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सेमनाले कं गंदे पानी से फाजिल्का के 132 गांव प्रभावित, पहुंची एनजीटी टीम

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फाजिल्का के एक गांव में ड्रेन की जांच करने पहुंची टीम के सदस्य व ग्रामीणों से बातचीत करते टीम के स? - फोटो : ABOHAR
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फाजिल्का के सीमावर्ती गांवों में लगातार सप्लाई हो रहे प्रदूषित पानी को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल टीम का एक शिष्टमंडल सोमवार को जांच करने के लिए पहुंचा। इस जांच को लेकर एनजीटी की तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। इसमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज जसबीर सिंह, पूर्व चीफ सेक्रेटरी पंजाब एससी अग्रवाल और तकनीकी विशेषज्ञ बाबू राम शामिल थे। इसके अलावा पर्यावरण प्रेमी संत बलबीर सिंह सीचेवाल, विभिन्न जिलों से डिप्टी कार्यालय के अधिकारी, फाजिल्का के डीसी मनप्रीत सिंह और एसडीएस सुभाष खटक मौजूद रहे।
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टीम ने गांव ठगनी, मुम्बेके, घडुम्मी और करनीखेड़ा के अलावा विभिन्न गांवों का दौरा किया और चार जगहों से पानी के सैंपल भी लिए। इस दौरान याचिका दायर करने वाले प्रगतिशील किसान विक्रम आहुजा ने एनजीटी की टीम को बताया कि पंजाब के कई हिस्सों से 21 सेमनालों का प्रदूषित पानी फाजिल्का से होकर बहता है। परिणामस्वरूप, इस गंभीर रूप से दूषित पानी के प्रवाह से जिले के 132 गांव प्रभावित हुए हैं। आहुजा ने कहा कि अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण, पंजाब के अन्य जिलों से अनुपचारित सीवरेज कचरे को ले जाने वाले 21 प्रमुख सीवरेज नाले फाजिल्का तक पहुंचते हैं। नतीजा यह है कि दशकों से फाजिल्का में इस अनुपचारित पानी का बड़े पैमाने पर संचय हो रहा है। इस दौरान टीम के सदस्यों ने विभिन्न जगहों पर ग्रामीणों से मुलाकात कर पानी को लेकर आ रही समस्याओं को भी सुना। तकनीकी विशेषज्ञ बाबू राम ने कहा कि मामले की रिपोर्ट बनाकर जल्द ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को सौंपी जाएगी और यहां के दूषित पानी की समस्या से लोगों को निजात दिलाई जाएगी। इस मामले को लेकर आज टीम द्वारा विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ एक बैठक की जाएगी जिसमें उक्त समस्या के बारे में विचार किया जाएगा। संत सीचेवाल ने कहा कि जहां से भी सीवरेज का पानी ड्रेनों में छोड़ा जा रहा है। वहीं सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का लगाए जाएंगे, ताकि समस्या का हल हो सके।
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फोटो एबीआर 4
फोटो कैप्शन: फाजिल्का के एक गांव में ड्रेन की जांच करने पहुंची टीम के सदस्य व ग्रामीणों से बातचीत करते टीम के सदस्।
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