देश के लिए दो बार ओलंपिक में हिस्सा लेकर भारत का विदेशों में डंका बजाने
वाले अर्जुन अवार्डी नरिंदर सिंह को श्रद्धांजलि देने न तो खेल विभाग का
कोई अधिकारी पहुंचा और न ही पीएपी का कोई सीनियर अधिकारी।
शनिवार को
पीएपी के श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। नरिंदर सिंह 1990
में सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स में बतौर इंस्पेक्टर भर्ती हुए
था। हरियाणा निवासी नरिंदर ने 1992 में पंजाब पुलिस का दामन थाम लिया और
सीआईएसएफ से इस्तीफा देकर पंजाब में इंस्पेक्टर की नौकरी ज्वाइन कर ली।
जूडो में दो बार ओलंपिक गेम्स में हिस्सा लेने वाले नरिंदर सिंह पहले
भारतीय खिलाड़ी थे।
उन्हें अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
नरिंदर सिंह की खेलों में बेहद रुचि थी। वह एक कोच के रूप में अपनी सेवाएं
देते रहे। दो साल पहले उनका दिल्ली में पार्किंग को लेकर विवाद हो गया।
इसपर उन्होंने एक युवक को गोली मार दी। इसके बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया
गया। दो साल से वह अपने उच्च अधिकारियों से लेकर गृह विभाग के लगातार चक्कर
लगाते रहे लेकिन उन्हें बहाल नहीं किया गया।
शुक्रवार रात को पीएपी
में अपनी रिहाइश में उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी। शनिवार को उनका अंतिम
संस्कार किया गया। पीएपी में वह छठी बटालियन में बतौर सहायक कमांडेंट अटैच
थे लेकिन पीएपी का कोई अधिकारी चंद कदम चलकर श्मशान घाट तक नहीं आया। उनकी
पत्नी सुमित ठाकुर अंतरराष्ट्रीय जूडो खिलाड़ी हैं जो एक निजी स्कूल में
सेवाएं दे रही हैं।
एडीसीपी सिटी जे इलेनचेलियन का कहना है कि
नरिंदर सिंह की पत्नी सुमित ठाकुर के बयान पर धारा 174 के तहत कार्रवाई की
गई है। उसकी पत्नी ने कहा है कि पति काफी परेशान चल रहे थे। वह शाम को कमरे
में गई तो पति का शव पंखे से लटका हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ
निकलता है तो जांच की जाएगी।