अब विज्ञान का भंडार गांव-गांव पहुंचेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में साइंटिफिक
अप्रोच बढ़ाने के लिए पुष्पा गुजराल साइंस सिटी ने एक नया प्रयास किया है।
साइंस एक्सप्रेस के अर्बन एरिया तक रहने के बाद मोबाइल साइंस एग्जीबिशन बस
ग्रामीण एरिया में साइंस का तिलिस्म फैलाएगी।
एक सप्ताह में पांच दिन पांच
किलोमीटर के दायरे में आने वाले पांच, सात या दस गांवों के सेंटर प्वाइंट
कलस्टर में बस रुकेगी और बच्चों और लोगों को साइंस की दुनिया से रूबरू
कराएगी। यह बस करीब डेढ़ साल में 62 लाख रुपये की लागत से तैयार हुई है। इस
पर कुल 90 लाख रुपये का खर्च आने की संभावना है। इसमें स्टाफ की सैलरी,
पेट्रोल और अन्य फुटकर खर्चें शामिल होंगे। 15 अगस्त 2015 को बस के रवाना
होने की संभावना है।
साइंस सिटी की डायरेक्टर जनरल डॉ. नीलिमा जैरथ ने
कहा कि यह बस गांव-गांव जाकर लोगों में वैज्ञानिक सोच अपनाने का संदेश
देगी। विज्ञान और तकनीक को कैरियर के तौर पर अपनाने के इच्छुक
विद्यार्थियों के लिए यह मोबाइल साइंस एग्जीबिशन बस एक वरदान साबित होगी।
उन्होंने बताया कि बस के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य, रिन्यूबेल एनर्जी,
जलवायु परिवर्तन और वेस्ट मैनेजमेंट के प्रति जागरूक किया जाएगा। सारी
जानकारी इंग्लिश और पंजाबी भाषा में पैनल के माध्यम से दी जाएगी।
यह बस
पंजाब के 22 जिलों के 100 कलस्टरों तक पहुंच बनाएगी। हर कलस्टर में आसपास
के पांच से सात गांवों को शामिल किया जाएगा। साइंस सिटी के डायरेक्टर डॉ.
राजेश गरोवर ने बताया कि साइंस एक्सप्रेस के बाद से एग्जीबिशन बस चलाने की
जरूरत महसूस हो रही थी। बस में बच्चों को रात के समय हाई टेलीस्कोप की मदद
से तारों की दुनिया भी दिखाई जाएगी। एग्जीबिशन चार सेगमेंट हेल्थ,
एनवायरमेंट, एनर्जी और एस्ट्रोनॉमी पर बेस्ड है। इसमें दो साइंस गाइड व एक
प्रोजेक्ट असिस्टेंट तैनात होगा, जो हर समय इस बस में रहेंगे। एक कलस्टर
में बस पांच दिन रुकेगी। उन्होंने बताया कि आइकेपीटीयू ने एग्जीबिशन के लिए
बस उपलब्ध करवाई और 62 लाख रुपये एग्जीबिशन सहित पूरी बस को तैयार करने
में खर्च हुए हैं। 28 लाख रुपये इसके पंजाब भर में घूमने और स्टाफ की सैलरी
पर खर्च होंगे।