सुप्रीम कोर्ट की तरफ से निजी डेंटल कॉलेजों के 451 बीडीएस विद्यार्थियों
की अपील खारिज करने से सूबे के 51 एमडीएस स्टूडेंट्स के भविष्य पर भी तलवार
लटक गई है। इन्होंने एक महीना पहले ही बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी और
डीआरएमई की चेतावनी के बावजूद राज्य के सात निजी डेंटल कॉलेजों में दाखिला
लिया हुआ है।
बाबा फरीद विवि के अनुसार यूनिवर्सिटी ने पिछले माह पीजी
कोर्स में दाखिले के लिए काउंसिलिंग का आयोजन किया गया था। इस दौरान निजी
डेंटल कॉलेजों में एमडीएस के 51 सीटें खाली रह गईं। पिछले वर्ष नियमों की
अनदेखी करके बीडीएस की खाली सीटें भरने वाले निजी कॉलेजों ने इस वर्ष भी
विवि व डीआरएमई की सहमति के बिना ही एमडीएस की इन खाली सीटों को भर लिया।
नियमों
के अनुसार एमडीएस में दाखिले के लिए एआईपीजीडीईई की प्रवेश परीक्षा में
शामिल होना जरूरी होता है लेकिन निजी कॉलेजों ने इस नियम की अनदेखी करते
हुए बिना प्रवेश परीक्षा वाले स्टूडेंट्स को ही दाखिला दे दिया। 2 जून को
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के 451 बीडीएस स्टूडेंट्स का दाखिला रद्द करने के
फैसले पर चार दिन पहले सुप्रीम कोर्ट भी अपील खारिज कर चुका है।
इस फैसले
से 51 एमडीएस स्टूडेंट्स पर भी दाखिले रद होने की तलवार लटक चुकी है। विवि
के वीसी डॉ. राज बहादुर ने कहा कि नियमों की अनदेखी करके किसी भी कोर्स में
दाखिला लेने वाले स्टूडेंट्स अपने भविष्य के लिए खुद ही जिम्मेवार होते
हैं।