पंजाब के इतिहास में मानसा की धरती का अपना अलग महत्व रहा है। यह वह इलाका है, जहां कभी जमीन पर अधिकार के लिए मुजारों ने संघर्ष किया, जहां किसान-मजदूर आंदोलनों ने सत्ता और व्यवस्था को चुनौती दी और जहां से उठी आवाज ने समय-समय पर पंजाब की राजनीति को नई दिशा दी।
अब इसी मानसा की धरती से नशे के खिलाफ उठी आवाज ने पूरे पंजाब को झकझोर दिया है। नशे के विरुद्ध अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्तूबर को गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद मामला केवल एक व्यक्ति की हत्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नशे के कारोबार, कानून-व्यवस्था और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा का बड़ा सवाल बन गया है।
झोटा की हत्या के विरोध में 15 अक्तूबर को विभिन्न किसान संगठनों, कर्मचारी संगठनों, व्यापारिक संगठनों और राजनीतिक दलों के समर्थन से पंजाब बंद का आह्वान किया गया है। परिवार और समर्थक मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। इस घटनाक्रम ने मानसा को एक बार फिर पंजाब के व्यापक जनप्रतिरोध के केंद्र में ला खड़ा किया है।
नक्सलबाड़ी आंदोलन की गूंज भी पहुंची
मानसा की धरती का पंजाब के इतिहास में विशेष महत्व रहा है। यहां जमीन पर अधिकार के लिए मुजारों ने संघर्ष किया था। किसान-मजदूर आंदोलनों ने भी सत्ता को चुनौती दी। 1928 में रियासती शासन के खिलाफ राजनीतिक चेतना उभरी। 1960 के दशक में नक्सलबाड़ी आंदोलन की गूंज भी यहां तक पहुंची थी। इन आंदोलनों ने भूमि अधिकार और सामाजिक न्याय के सवाल उठाए।
दशकों बाद मानसा में संघर्ष का मुद्दा बदल गया है। पहले जमीन और मालिकाना हक का सवाल था। अब पंजाब की युवा पीढ़ी को नशे से बचाने की चिंता केंद्र में है। झोटा की हत्या के बाद यह मामला प्रदेशव्यापी मुद्दा बन गया। राजनीतिक दलों, किसान संगठनों और सामाजिक संगठनों ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों को सजा दिलाए।
परिवार को न्याय मिलना चाहिए
इतिहास की प्रोफेसर सोनिया मेहता का कहना है कि मानसा का इतिहास क्रांतिकारी रहा है। अब सवाल है कि क्या पंजाब नशे के खिलाफ इस आवाज को ठोस कार्रवाई में बदल पाएगा। परविंदर झोटा की हत्या की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उनके परिवार को न्याय मिलना चाहिए। नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई ही इसका वास्तविक जवाब है। यह चुनौती नारों से नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच और सामूहिक भागीदारी से हल होगी।