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हरिवल्लभ संगीत महोत्सव में शहनाई की गूंज सुनकर झूम उठे श्रोता

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जालंधर। श्री देवी तालाब मंदिर परिसर में रविवार को पद्मश्री पंडित जसराज और पद्मश्री रागी बलवीर सिंह को समर्पित 145वें हरिवल्लभ संगीत महोत्सव का आयोजन किया गया। वर्ष 1875 से जालंधर की शान रहे श्री हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन पहली बार कोरोना के कारण एक दिन में सिमट गया।
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रविवार को सम्मेलन की शुरुआत सुबह हवन के साथ हुई। हवन श्री बाबा हरिवल्लभ जी की प्रतिमा के सामने किया गया। इस दौरान कोरोना वायरस से बचाव के प्रबंध किए गए थे। श्रोताओं को एक-दूसरे से दूर बैठाया गया। कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत के बाद मंच पर अश्वनी और संजीव शंकर की शहनाई गूंजी। दूसरी पेशकश में डॉ. प्रशांत और डॉ. निशांत मलिक बंधुओं ने ध्रुपद गायन की शुरुआत आलाप से की। इसमें पखावज पर उनका साथ गौरव उपाध्याय और तानपूरे पर भूपेश एवं सुमित ने दिया। उन्होंने राग भीमपलासी आल्हा चार दर्जे की और चार ताल की बखूबी प्रस्तुति दी।
सम्मेलन में जालंधर के शास्त्रीय संगीतकार मनोज सेन ने सितार बजाकर लोगों का दिल जीत लिया। उस्ताद काले राम की उंगलियां तबले पर इस तरह थिरकीं की पूरा हाल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने सरस्वती राग में झपताल, तीन ताल, शंतरा और पंजाबी बंदिश की पेशकश की। हाल में मौजूद दर्शकों ने भी शास्त्रीय संगीत का खूब आनंद उठाया। कार्यक्रम के दौरान हर प्रस्तुति के बाद मंच को पूरी तरह सैनिटाइज किया गया। इस मौके पर हरिवल्लभ संगीत सभा की प्रधान पूर्णिमा बेरी, महासचिव दीपक बाली, पूर्व कैबिनेट मंत्री मनोरंजन कालिया, नितिन कपूर, रमेश मोद्गिल, कुलविंदर कौर, अशोक शर्मा मौजूद थे।
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पहली बार संगीत मुकाबले नहीं
हर साल 27 दिसंबर से शुरू होने वाले हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन में संगीत मुकाबले होते रहे हैं। इस बार कोरोना महामारी के कारण सभा की तरफ से संगीत मुकाबले भी नहीं करवाए गए। वहीं शास्त्रीय संगीत के बड़े कलाकार भी नहीं आए। सिर्फ एक दिन का रस्मी कार्यक्रम हुआ।
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