संवाद न्यूज एजेंसी
होशियारपुर। पूर्व सांसद अविनाश खन्ना ने वंदे मातरम के विरोध पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय चेतना और स्वाधीनता की भावना का प्रतीक था।
खन्ना ने बताया कि वंदे मातरम का सरल अर्थ मां की वंदना है, जिसमें राष्ट्रप्रेम की भावना निहित है। इसकी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह त्याग, शौर्य व समर्पण का प्रतीक है। वर्ष 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे कोलकाता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार गाया था। 1950 में संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया। खन्ना के अनुसार, इस गीत का सर्वोच्च उद्देश्य प्रत्येक भारतीय के हृदय में देशभक्ति जगाना है। उन्होंने कहा कि बिना वजह इसका विरोध करना राष्ट्रभावना और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को आहत करता है।