शुक्रवार को डिवीजन नंबर चार में भाजपा के पार्षद जोगिंदर सिंह टोनी इंसाफ न मिलने से रोेष में थाने में ही जमीन पर लेट गए। उनके समर्थकों को जैसे ही सूचना मिली तो वह डिवीजन नंबर चार में जमा हुए और थाने के मुख्य द्वार पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। इस दौरान किसी को न तो अंदर जाने दिया गया और न ही बाहर आने दिया गया। थाने में पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई।
भाजपा पार्षद का कहना था कि वीरवार रात को वह एक केस में पार्टी के साथ आए थे, जिस दौरान दूसरे गुट के एडवोकेट बजाज, उनके बेटे और विशाल स्याल ने साथियों के साथ उन पर हमला कर दिया। न केवल उनकी दाढ़ी नोची गई बल्कि पगड़ी भी उतार दी गई। प्रदर्शन के बाद एडवोकेट आरके बजाज, उनके बेटे विशाल बजाज और विशाल स्याल पर धार्मिक भावनाएं भड़काने और जातिसूचक अपशब्द कहने का मामला दर्ज किया गया है।
इस मौके पर भावाधस के प्रदेश प्रधान विपिन सभ्रवाल भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि वीरवार रात को वह भी थाना चार में आए थे, उन्होंने टोनी का बचाव किया तो दूसरे गुट के लोगों ने उनको भी जाति के प्रति अपशब्द कहे। थाने में ही एक आरोपी को पकड़कर एएसआई को सौंप दिया था। शुक्रवार सुबह टोनी अपनी शिकायत के मामले में कार्रवाई जानने के लिए थाने पहुंचे तो पता चला कि आरोपी को वहां से छोड़ा जा चुका है। इसके बाद टोनी जमीन पर ही लेट गए और नारेबाजी करने लगे।
थाने का इलाका टोनी के पार्षद एरिया में आता है, इसलिए मानवाधिकार संगठन के शशि शर्मा, भावाधस के प्रदेश प्रधान विपिन सभ्रवाल, सिख तालमेल कमेटी के तजिंदर परदेसी, हरप्रीत नीटू और हरपाल सिंह चड्ढा शंटू भी अपने समर्थकों के साथ आ गए। करीब डेढ़ घंटे तक थाने में ही नारेबाजी होती रही लेकिन वहां पर मुंशी के अलावा कोई नहीं था। बाद में एसीपी देवदत्त शर्मा और एडीसीपी डोगरा पहुंचे। डोगरा ने आश्वासन दिया कि आरोपियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया जा रहा है। इसके बाद समर्थक तो चले गए लेकिन पार्षद टोनी जमीन पर ही दरी बिछाकर लेटे रहे, उनका कहना था कि जब तक उनको एफआईआर की कॉपी नहीं मिलती, वह वहां से नहीं जाएंगे। उन्होंने शाम करीब साढ़े सात बजे एफआईआर दर्ज होने के बाद धरना खत्म किया।