जालंधर के सिविल अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड के पीछे लगे गंदगी के ढेर।
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महानगर का सिविल अस्पताल पहले ही आदर्श सिविल अस्पताल की मिलने वाली उपाधी को खो चुका है। दिन प्रतिदिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं। यहां पर दाखिल मरीजों को नर्स के इंजेक्शनों से उतना डर नहीं लगता, जितना डर मच्छरों से है। जिस जगह यह जच्चा-बच्चा वार्ड बना हुआ है, उस वार्ड के पीछे गंदगी के ढेर लगे हुए हैं।
वार्ड के शीशे टूटे पड़े हैं, गंदगी के ढेर से उठने वाला मच्छर महिलाओं को परेशान कर रहे हैं। महिला मरीजों का कहना है कि वार्ड के शीशे टूटे होने से यहां मच्छर बहुत हैं, नवजात बच्चों पर भिनभिनाते मच्छरों से डर लगता है। इसके बारे में डॉक्टरों को बताया गया है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मरीजों ने खुद गत्ता व कपड़े लगाकर टूटे शीशों को ढक रखा है। अस्पताल से कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है, जिससे लगता है कि सफाई सेवकों की हड़ताल का असर सिविल में भी दिख रहा है।
सिविल अस्पताल में मरीजों का जमावड़ा लगा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल में बने प्राइवेट कमरे खाली पड़े हैं। दरअसल सिविल प्रशासन की ओर से एक कमरे का किराया 500 रुपये रखा गया है, जिसके कारण आम लोग इतना किराया देने में असमर्थ हैं। यहां मरीजों को वेटिंग रूम में रखा गया है, लेकिन लोग प्राइवेट रूम लेने के लिए तैयार नहीं हैं। वेटिंग रूम में मरीजों को रखे जाने से उनके रिश्तेदारों को बरामदे में ही बिस्तर बिछाकर बैठना पड़ रहा है।