जालंधर कमिश्नरेट की पुलिस ने रातोंरात आलू व्यापारी मोनू पुरी पर करोड़ों की चोरी का केस दर्ज कर लिया। बिना जांच के यह मामला अकाली दल के पूर्व विधायक सर्बजीत सिंह मक्कड़ के भाई बिट्टू मक्कड़ की शिकायत पर दर्ज किया गया। केस दर्ज होते ही मामला आला पुलिस अधिकारियों तक पहुंचा।
व्यापारियों ने बताया कि बिट्टू मक्कड़ ने धक्केशाही से यह केस दर्ज करवाया है। इसके बाद जालंधर कमिश्नर गुरशरण सिंह संधू व अन्य पुलिस अधिकारियों ने जांच तेज की और चंद घंटों बाद ही मामले को रद्द कर मोनू पुरी को क्लीन चिट दे दी गई। जांच में सामने आया कि मक्कड़ परिवार ने पुलिस को गुमराह कर केस दर्ज करवाया है।
मामला जालंधर में आलू व्यापारी मोनू पुरी का है, जिस पर बिट्टू मककड़ ने 29 जुलाई की रात को चोरी का केस दर्ज करवा दिया। आरोप लगाया कि मोनू पुरी उसके घर आया था और गहनों व पैसों से भरा बैग लेकर निकल गया। यह भी कहा कि 16 जुलाई को मोनू उनके घर यानी बिट्टू मक्कड़ के घर चाय पी रहा था, उस समय उनका दोहता वारिस भी मौजूद था। इस बीच फोन आया कि बिट्टू मक्कड़ की साली गुरविंदर कौर मिंटू की दुर्घटना हो गई है। बिट्टू मक्कड़ का कहना है कि वह अपनी पत्नी के साथ तत्काल चले गए। वारिस घर में था। बाद में वारिस ने बताया कि मोनू पुरी घर से बैग लेकर गया है, जिसमें 50 लाख रुपये की नकदी के अलावा 1.5 करोड़ के गहने थे।
दिलचस्प बात है कि पुलिस ने मामले की जांच ही नहीं की और 29 जुलाई की रात को आलू व्यापारी पर चोरी का मामला भार्गव कैंप में दर्ज कर लिया। मोनू के करीबियों ने तत्काल इस झूठे मामले की जानकारी चंडीगढ़ के आला पुलिस अधिकारियों को दी, जिसके बाद जालंधर पुलिस पर दबाव बढ़ा। 30 जुलाई को पुलिस ने जांच की तो पाया कि गुरविंदर कौर का एक्सीडेंट 17 जुलाई की सुबह 2 बजे हुआ था। 16 जुलाई को मोनू पुरी तो सुलतानपुर लोधी में थे। उनकी कॉल रिकॉर्ड चेक की गई। वहां से रात 10 बजे लौटे तो पुलिस ने वहां की सीसीटीवी भी चेक करवाई। इसके बाद पुलिस ने मामले में मोनू को क्लीन चिट दे दी। डीसीपी जगमोहन सिंह ने बताया कि केस झूठा दर्ज किया गया था, हमने 24 घंटे में केस रद्द कर दिया है। केस कैसे दर्ज हो गया? इसकी गहराई से जांच की जा रही है।