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जालंधर: सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस है नेहरू गार्डन सरकारी कन्या स्कूल, विदेशों में भी नाम रोशन कर रहीं यहां पढ़ीं छात्राएं

Sun, 01 May 2022 02:17 PM IST
निवेदिता वर्मा मनमोहन सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)

सार

नेहरू गार्डन सरकारी स्कूल का नाम प्रदेश के नामवर स्कूलों की सूची में आता है। 1947 में स्थापित स्कूल में जितने कमरे नहीं हैं उससे ज्यादा तो यहां के टॉपर बच्चे हैं।
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जालंधर का नेहरू गार्डन सरकारी स्कूल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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एक तरफ पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को सुधारने के लिए दिल्ली मॉडल लागू करने की तैयारी कर रही है वहीं पंजाब के ऐसे सरकारी स्कूल भी हैं, जिनका डंका पूरे विश्व में बजता है। आजादी के साथ ही शिक्षा की अलख जगाए बैठे जालंधर के सरकारी कन्या सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल नेहरू गार्डन का इतिहास भी अकल्पनीय है, यहां की छात्राओं को बेटियों की तरह प्यार मिलता है और सर्वोच्च शिक्षा भी।

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नेहरू गार्डन सरकारी स्कूल का नाम प्रदेश के नामवर स्कूलों की सूची में आता है। 1947 में स्थापित स्कूल में जितने कमरे नहीं हैं उससे ज्यादा तो यहां के टॉपर बच्चे हैं जो देश में ही नहीं विदेशों में भी पंजाब का नाम रोशन कर रहे हैं। जब पंजाब में उच्च शिक्षा की बात होती है तो सरकारी कन्या सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल नेहरू गार्डन का नाम सबसे पहले लिया जाता है। कारण यह है कि यहां सरकारी स्कूल में रिकॉर्ड 3300 छात्राओं को शिक्षित किया जा रहा है और 120 टीचरों का स्टाफ पूरी तनदेही और लगन से अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।
 
स्कूल में 56 क्लास रूम हैं जिसमें 13 स्मार्ट क्लासें हैं। स्कूल में चार विभाग हैं जिसमें साइंस, आर्ट, कॉमर्स और वोकेशनल की पढ़ाई करवाई जाती है। स्कूल में शिक्षा का स्तर टॉप क्लास है। कक्षा छठीं से बारहवीं तक वाले इस कन्या स्कूल में हुनर और जज्बे की बेमिसाल कहानियां हैं। इस कारण दुनिया भर में स्कूल का डंका बजता है। बात साइंस विभाग की करें तो यहां 4 साइंस लैब, जिसमें फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बायोलॉजी और जरनल लैब हैं। यहां विश्व स्तर के उपकरणों से अनुभवी और शिक्षित स्टाफ की देखरेख में छात्राएं प्रैक्टिकल करती हैं। 
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स्कूल में वर्ल्ड क्लास लाइब्रेरी में 7 हजार के करीब किताबें हैं जिन्हें पढ़कर यहां की दो छात्राएं आईएएस बन गईं। स्कूल की कंप्यूटर लैब का कोई सानी नहीं, यहां टीचिंग और लर्निंग के लिए 80 के करीब कंप्यूटर लगाए गए हैं, जिसमें 7 टीचरों का स्टाफ छात्राओं को कंप्यूटर भाषा में आधुनिकता की परिभाषाएं व्यक्त करता है। स्कूल में स्पोर्ट्स ब्लॉक भी है और शानदार प्ले ग्राउंड भी, यहां की छात्राएं स्टेट लेवल खिलाड़ी भी रहीं है, आज भी खेलों के प्रति लगाव रखने वाली छात्राएं यहां तैयारी करती हैं। यहां के आर्ट रूम की बात ही अलग हैं क्योंकि स्कूल में जब किसी चित्रण की बात आती है तो छात्राएं ही बनाती हैं, स्कूल की दीवारों पर शैक्षणिक चित्रकारी ज्ञानवर्धक होने के साथ उच्च कोटि की होती है। 

इन सभी में खास है ह्यूमेनटीस ब्लॉक, जहां छात्राओं को समाज के प्रति जिम्मेदारी, नैतिकता और आदर्शवादी बनने का पाठ पढ़ाया जाता है। स्कूल में स्थापित मैथ लैब में ऐसा कोई प्रश्न नहीं जिसका हल न हो वो भी एक से अधिक सूत्रों से। मैथ लैब की इंचार्ज टीचरों ने बताया कि वे बच्चों पर सिलेबस थोपते नहीं है उनके हुनर को निखारते हैं।

सर्वोच्च सम्मान : चार प्रिंसिपल राष्ट्रपति से नेशनल अवार्ड सम्मानित

1947 से शिक्षा की अलख जगा रहा सरकारी कन्या सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल नेहरू गार्डन में छात्राओं की बहुमूल्य शिक्षा में यहां प्रिंसिपल का योगदान सराहनीय है। इस कारण 4 प्रिंसिपल सर्वोच्च सम्मान से नवाजी जा चुकी हैं। इनमें मौजूदा प्रिंसिपल गुरिंदरजीत कौर को 2014 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने नेशनल अवार्ड टू टीचर्स से 2015 में सम्मानित किया था, वह स्टेट अवार्ड से भी सम्मानित हो चुकी हैं। इससे पहले नेशनल अवार्ड टू टीचर्स 1991 में प्रिंसिपल रमिंदर कौर को तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने 1992 में, 1999 में प्रिंसिपल जतिंदर कौर को राष्ट्रपति केआर नारायणन ने 2000 में और नेशनल अवार्ड 2004 प्रिंसिपल हरजीत कौर गिल को तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने 2005 में सम्मानित किया था।

गोल्ड मेडलिस्ट हैं यहां की छात्राएं, विदेशों में भी अच्छी पोस्ट पर

सरकारी कन्या सीसे स्मार्ट स्कूल नेहरू गार्डन का डंका ऐसे ही दुनिया भर में नहीं बजता, देश हो या विदेश ऐसा कोई विभाग नहीं जहां स्कूल की छात्राओं की भागीदारी न हो। स्कूल से निकली दो छात्राएं आईएएस हैं जिसमें दिशा पन्नू इंडियन पोस्टल सर्विस और डॉ. कनिष्का बीडीएस आईआरएस (इंडियन रेवेन्यू सर्विस) में हैं। वहीं 25 के करीब एमबीबीएस/बीएएमएस डॉक्टर्स निकली जो पंजाब के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दे रही हैं। इंजीनियर्स और बैंकर्स की लिस्ट काफी लंबी है यहां की छात्राएं पीएचडी में गोल्ड मेडलिस्ट होने के साथ रिसर्च में भी है। कुछ टॉपर छात्राएं हैं जो कनाडा और आस्ट्रेलिया में स्टडी के लिए गई और अब वहीं सेटल होकर बड़े पदों पर सेवाएं दे रही हैं।

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