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डीबीए के खिलाफ इंटरनेशनल बैडमिंटन खिलाड़ी ने खोला मोर्चा

Wed, 18 Nov 2015 09:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
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नगर निगम प्रशासन के करोड़ों ठगने वाली डिस्ट्रिक्ट बैडमिंटन एसोसिएशन (डीबीए) के खिलाफ इंटरनेशनल बैडमिंटन खिलाड़ी सचिन रत्ती ने मोर्चा खोला है।
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सचिन ने बुधवार को डीबीए के अधिकारियों और सदस्यों के खिलाफ थाना नंबर चार में शिकायत सौंपी है। इसमें डीबीए के उपप्रधान राजिंदर सिंह कलसी, सचिव अश्वनी कुमार, ज्वाइंट सेक्रेटरी एसएस नंदा के अलावा एकेडमी कोच जयदीप कोहली, कर्णदीप कोहली और नीरज बांसल शामिल हैं।

शिकायत में डीबीए के छह लोगों के नाम लिखे गए हैं। उन पर पर्चा दर्ज करने की मांग की गई है। सचिन रत्ती का आरोप है कि डीबीए के ये छह लोग निगम प्रशासन के करोड़ों ठगने का काम कर चुके हैं।
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बिना चुनाव करवाए डीबीए की बॉडी को चलाया जा रहा है। बैडमिंटन स्टेडियम चलाने के नाम पर डीबीए हर महीने लाखों कमाई कर रही है।

इंटरनेशनल खिलाड़ी रत्ती ने कहा कि डीबीए की ओर से किए जा रहे गलत कामों को रोकने के लिए उन्होंने पुलिस में शिकायत की है। डीबीए खिलाड़ियों को तैयार करने के बजाये खुद मोटी कमाई कर रहा है।

उन्होंने कहा कि साल 1960 में डीबीए ने नगर निगम से बैडमिंटन स्टेडियम चलाने के लिए जगह लीज पर ली थी। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि लीज पर ली गई जगह को आगे किराए पर नहीं दिया जा सकता है, मगर डीबीए के पदाधिकारियों ने लीज पर ली बैडमिंटन स्टेडियम की जगह आगे किराए पर चढ़ाई है।

डीबीए बैडमिंटन सेंटर तो चला रहा है, मगर उसके आगे वाली जगह पर दुकानें बनाकर किराए पर चढ़ाई हुई है। इससे हर माह डीबीए को 90 हजार की आमदन हो रही है। डीबीए ने स्टेडियम वाली जगह के आगे आठ-दस दुकानें बनाई हैं, जिसे किराए पर दिया गया है।

वहीं आर्थिक संकट से जूझ रहे निगम को एक पैसे की आमदन नहीं हो रही है। बैडमिंटन स्टेडियम के लिए लीज पर ली गई जगह का किराया बहुत ही कम है। उन्होंने कहा कि डीबीए के चुनाव साल 2013 के बाद से नहीं करवाए गए हैं।

इसके बिना ही बॉडी को चलाया जा रहा है। डीबीए के पदाधिकारी खुद की मनमानी चला रहे हैं। सचिन रत्ती ने कहा कि नगर निगम का पैसा लुटने वाले डीबीए के पदाधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज होना चाहिए।

सचिन ने पुलिस शिकायत में कहा है कि डीबीए एकेडमी कोच पर लाखों रुपये लुटा रहा है। एकेडमी में तीन कोच रखे गए हैं। उन्हें हर माह 90 हजार वेतन दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि एकेडमी कोच जयदीप कोहली को 40 हजार, कर्णदीप कोहली को 20 हजार और नीरज बांसल को 30 मासिक वेतन डीबीए की तरफ से दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह सब राजिंदर सिंह कलसी, अश्वनी कुमार और एसएस नंदा की मनमानी के चलते किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि सरकारी कोच को खेल विभाग की ओर से 15,000 रुपये मासिक वेतन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि एकेडमी के तीनों कोच डीबीए के लाइफ मेंबर हैं। कानून के अनुसार डीबीए का लाइफ मेंबर कोचिंग देने के लिए एकेडमी से पैसे नहीं ले सकता है, मगर ऐसा नहीं हो रहा है।
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