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Jalandhar News: भारतीय रेलवे का ऐतिहासिक जेडबी 66 स्टीम इंजन चार वर्ष बाद पठानकोट लौटा

Tue, 09 Jun 2026 10:28 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
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रेवाड़ी से टीम आएगी भाप इंजन की मरम्मत करने, फिर पठानकोट से टीम इंजन चलाने की ट्रेनिंग लेने रेवाड़ी जाएगी
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अगर इंजन ठीक हुआ तो दशकों बाद हिमाचल की वादियों में आएगी छुक-छुक की आवाजें

संवाद न्यूज एजेंसी
पठानकोट। भारतीय रेलवे का ऐतिहासिक जेडबी 66 स्टीम इंजन चार वर्ष बाद पठानकोट लौट आया है। यह इंजन हिमाचल की वादियों की असली पहचान रहा है। इसे रेवाड़ी की एकमात्र स्टीम लोको कार्यशाला में व्यापक मरम्मत के बाद लाया गया है।
इंजन को अब पठानकोट सिटी रेलवे स्टेशन के नैरोगेज रेल डीजल शेड में रखा गया है। लोग और रेल प्रेमी इसे देखने दूर-दूर से आ रहे हैं। इस भाप इंजन को कांगड़ा वैली एक्सप्रेस भी कहा जाता था। यह अपनी विशिष्ट सीटी और काले धुएं से भारतीय रेल के स्वर्णिम इतिहास की याद दिलाता था। लंदन की प्रसिद्ध कंपनी डब्ल्यू जी बैगन लिमिटेड ने 1952 में इसे बनाया था। इसे पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेलखंड पर तैनात किया गया था। इसने 1976 तक लगातार अपनी सेवाएं दीं। यह 2-6-2टी लोकोमोटिव कांगड़ा वैली रेलवे का अंतिम सक्रिय भाप इंजन है। दशकों बंद रहने के बाद 2017 में इसे विशेष मरम्मत कर दोबारा चलाया गया था।
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इंजन का शानदार व्यावसायिक इतिहास
इस भाप इंजन का व्यावसायिक इतिहास बेहद शानदार रहा है। दो दशक के इंतजार के बाद, 2018 में रेलवे ने इसे पूरी तरह चालू किया। दो विशेष कोचों के साथ इसे चार्टर्ड विरासत सेवा के रूप में पटरी पर उतारा गया। इंग्लैंड से आए 14 वरिष्ठ ब्रिटिश पर्यटकों ने 14 किलोमीटर की यात्रा के लिए करीब 1.5 लाख रुपये का किराया दिया था।
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मरम्मत और भविष्य की योजनाएं
पठानकोट नैरोगेज स्टेशन अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि इस इंजन की मरम्मत के लिए रेवाड़ी से एक टीम आएगी। रेवाड़ी में नैरोगेज रेल लाइन न होने से इसका रखरखाव पूरा नहीं हो पाया था। यदि मरम्मत सफल रही तो इसे चलाने के लिए पठानकोट से एक टीम रेवाड़ी प्रशिक्षण लेने जाएगी। सफल रखरखाव पर इसे दोबारा हिमाचल भेजा जाएगा। अन्यथा इसे पर्यटकों को लुभाने के लिए समय-समय पर लोको शेड से पटरी पर चलाकर दिखाया जाएगा।
फोटो: 02 पठानकोट पहुंचा जेडबी-66 भाप इंजन।
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