गो सेवा आयोग ने नगर निगम के कमिश्नर को पशुओं की सुरक्षा और कामकाज में लापरवाही का जिम्मेदार ठहराकर 15 दिन के भीतर जवाब मांगा है।
अन्यथा कमिश्नर के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। आयोग के चेयरमैन कीमती भगत ने शुक्रवार को जालंधर में प्रेस वार्ता कर पशुओं से जुड़े अहम आदेशों की पालना करने का जिम्मेदार निगम कमिश्नर गुरप्रीत खैहरा को ठहराकर चेतावनी दी है।
आयोग के चेयरमैन कीमती भगत ने कहा बीते दिनों जालंधर में निगम की लापरवाही से एक गाय की मौत हो गई थी। इसके बावजूद निगम ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
कांग्रेसी पार्षद देसराज जस्सल ने गाय की बीमारी को लेकर मामला निगम हाउस में उठाया था, लेकिन फिर भी कार्रवाई नहीं की गई। कीमती भगत ने कहा कि आयोग की ओर से कई अहम आदेश जारी किए गए थे, जिनको सरकार ने भी मंजूर कर दिया, लेकिन उन्हें निगम लागू नहीं कर रहा।
इसमें पंजाब की 32 कमेटियों की ओर से गो सेवा टैक्स लगाया जाना था, सीएम और सरकार के आदेश भी जारी हो गए। जालंधर के नगर निगम के कमिश्नर इस प्रस्ताव को भी पास नहीं करवा पाए, अगर गो सेवा टैक्स का पैसा नहीं मिलेगा तो गोशाला में सुधार कैसे होगा।
इसका जवाब भी कमिश्नर से मांगा गया है। एनीमल एक्ट के अधीन शहर के सभी जानवरों की देखभाल की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है, लेकिन सड़कों पर लावारिस पशु घूम रहे हैं, जिनके लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।
निगम की ओर से हाउस में प्रस्ताव पास हुआ था कि जालंधर की दो गोशाला को प्रतिमाह एक लाख रुपये नगर निगम अदा करेगा, लेकिन बीते 18 माह से राशि पेंडिंग है।
आयोग के चेयरमैन कीमती भगत ने कहा कि सभी बातें काफी संवेदनशील हैं और ठोस कदम उठाने व नियमों की पालना करने में निगम के कमिश्नर फेल साबित हो रहे हैं।
इसलिए आयोग की तरफ से 15 दिन का नोटिस जारी किया गया है। इन तय दिनों के भीतर अगर एक्शन व कदम नहीं उठाए जाते तो कमिश्नर को 15 दिन के बाद तलब किया जाएगा।
उधर, नगर निगम के कमिश्नर गुरप्रीत खैहरा का कहना है कि निगम पूरी तरह से संजीदा है और गोशाला को लगातार पैसा दिया जा रहा है।
गोशाला पूरी तरह से भरी हुई हैं, ऐसे में लावारिस पशुओं को रखने का कोई स्थान नहीं है। गो सेवा कर नगर निगम के हाउस ने पास करना है, यह उनके हाथ में नहीं है। उन्होेंने कहा कि उनकी ओर से कोई कोताही नहीं की जा रही।