पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल जालंधर के वकील नरिंदर पाल सिंह को दो दशक बाद बड़ी राहत दी है। अदालत ने बीमा कंपनी को इलाज, पुनर्वास और भविष्य की मेडिकल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए करोड़ों रुपये का मुआवजा ब्याज सहित जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना पीड़ितों के मामलों में सिर्फ आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
साल 2002 का है मामला
हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की बेंच ने स्पष्ट किया कि मुआवजे का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि पीड़ित के सम्मानजनक जीवन, इलाज और भविष्य की जरूरतों को सुरक्षित करना भी है। अदालत ने बीमा कंपनियों से अपेक्षा जताई कि वे पीड़ितों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण और उदार रुख अपनाएं। यह मामला वर्ष 2002 का है, जब जालंधर के युवा वकील नरिंदर पाल सिंह एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सिर में गहरी चोट, सुनने की क्षमता में कमी और लगातार स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनका पेशेवर जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। वर्षों तक देश-विदेश में इलाज कराने के बाद भी हालत में सुधार नहीं हो पाया और अंततः अमेरिकी ब्रेन सर्जरी ही अंतिम विकल्प बचा, जिसकी लागत परिवार के लिए असंभव थी।