आधुनिक कृषि यंत्र से धान की पराली को खेत में मिलाता किसान गुरमीत सिंह।
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धान की पराली को आग लगाए बिना खेती करने के सरकार के प्रयास सफल होने शुरू हो गए हैं। उपमंडल के गांव धरांगवाला निवासी प्रगतिशील किसान गुरमीत सिंह पांच वर्षों से धान के खेतों में पराली को आग लगाए बिना हैप्पी सीडर से गेहूं की बुआई कर अन्य खेतों से अधिक पैदावार प्राप्त कर रहे हैं। आमतौर पर धान की पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है, लेकिन गुरमीत 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार निकाल चुके हैं।
किसान गुरमीत सिंह का कहना है कि गेहूं या धान की पराली को आग लगाने से वातावरण प्रदूषित होता है। जमीन में पाए जाने वाले किसानों के मित्र कीट भी समाप्त हो जाते हैं। इतना ही नहीं पराली में लगी आग की तपिश से खेतों की उर्वरक शक्ति भी खत्म हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप अगली फसल पर विभिन्न प्रकार की बीमारियों व नुकसानदायक कीटों का हमला होता है। करीब 100 एकड़ जमीन पर खेती करने वाले किसान का कहना है कि अगर हम अपनी आने वाली पीढ़ी को साफ-सुथरा वातावरण देना चाहते हैं तो हमें अभी से जागरूक होना होगा। उन्होंने कहा कि वे पिछले पांच वर्षों से धान कटाई के बाद मलचर या सुपरसीडर से पराली को हरी खाद के रूप में खेत में ही दबा देते हैं और उसके ऊपर हैप्पी सीडर से गेहूं की बुआई कर उन्नत पैदावार प्राप्त करते हैं। उन्होंने अन्य किसानों से भी अपील की है कि वे कृषि एवं किसान भलाई विभाग से संपर्क कायम कर कम खर्च पर अधिक पैदावार प्राप्त करने की जानकारी हासिल कर सकते हैं। पराली जलाने के खिलाफ जागरुकता फैलाने वाले किसान गुरमीत सिंह के इस प्रयास की जिला प्रशासन ने भी कई बार सराहना की है।