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58 फीसदी सरकारी स्कूलों के सैंपल फेल

Tue, 23 Jun 2015 09:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदकोट
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जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। मिड डे मिल स्कीम के तहत कुछ दिन पहले तमाम सरकारी स्कूलों से भरे गए पीने के पानी के सैंपलों की रिपोर्ट ने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। रिपोर्ट में जिला फरीदकोट के 58 फीसदी स्कूलों के सैंपल फेल पाए गए है।
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मिड डे मिल स्कीम के तहत मिले निर्देशों के आधार पर शिक्षा विभाग ने फरीदकोट जिले के सभी प्राइमरी, मिडिल, हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों से पीने के पानी की क्वालिटी जांचने के सैंपल भरवाए थे। ज्यादातर स्कूलों में विद्यार्थियों को पीने के लिए ग्राउंड वाटर ही उपयोग करना पड़ता है जबकि कुछ स्कूलों में नहर का पानी भी उपलब्ध है। मालवा क्षेत्र के ग्राउंड वाटर की हालत किसी से भी छिपी नहीं है और इसकी वजह से लोग कैंसर, हैपेटाइटिस समेत अन्य गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। अब स्कूलों के इन सैंपलों की रिपोर्ट ने पूरे शिक्षा विभाग की नींद उड़ा कर रख दी है।


विभागीय सूत्रों के अनुसार फरीदकोट जिले के 251 प्राइमरी स्कूलों के अलावा 166 अन्य मिडिल, हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के सैंपल भरे गए थे, जिनमें से 58 फीसदी स्कूलों का पानी मानकों पर खरा नहीं उतर पाया। सैंपलों की रिपोर्ट के अनुसार 251 प्राइमरी स्कूलों में से 152 की रिपोर्ट फेल आई है और इन स्कूलों के पानी को पीने से बीमार होने का अंदेशा जताया गया है।
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166 मिडिल, हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की रिपोर्ट भी काफी चिंताजनक है और इनमें से भी 90 स्कूलों के सैंपल फेल हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार स्कूलों के पानी में टीडीएस की मात्रा काफी अधिक है और इस पानी का सेवन करने से कोई भी बीमारियों की चपेट में आ सकता है।


इस मामले डिप्टी डीईओ (स) सुरेश अरोड़ा ने कहा कि शिक्षा विभाग ने अपने तमाम सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए खुद सैंपल भरवाए थे। इनकी चिंताजनक रिपोर्ट पर गंभीरता से मंथन हो रहा है। साफ पानी मुहैया करवाने के लिए कोई फंड नहीं होने के चलते विभाग ने प्रभावित स्कूलों के मुखियों को अपने स्तर पर पीने के साफ पानी का प्रबंध करने की हिदायतें दी हैं। इसके लिए उन्हें अपने क्षेत्र की समाजसेवी संस्था से मदद का आह्वान किया गया है।
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