सी-30 पिस्तौल
30 बोर की ऐसी पिस्तौल चीन की बनी होती है, जो पंजाब में गैंगस्टरों की पहली पसंद बनी हुई है। पंजाब में जितने भी बडे़ गैंगवार के मामले सामने आए हैं, उनमें गैंगस्टरों ने ज्यादातर 30 बोर की पिस्तौल का ही प्रयोग किया था। इसकी खासियत यह है कि एक बार लोड करने के बाद उसका ट्रिगर दबा दिया तो फायर मिस नहीं होता, इसी कारण गैंगस्टर ऐसी पिस्तौल को पसंद करते हैं। महंगा होने के कारण इसे लाने के लिए गैंगस्टर हमेशा विदेशों से फंडिंग प्राप्त करते हैं। यह पिस्तौल गैंगस्टरों तक भारी संख्या में पहुंच चुकी है। पंजाब पुलिस के एसपी मनप्रीत सिंह ढिल्लों का कहना है कि पुलिस भारी संख्या में पिस्तौल बरामद भी कर चुकी है फिर भी गैंगस्टरों के पास सी-30 पिस्तौल काफी है।
तुर्की की 9 एमएम पिस्तौल
तुर्की की 9 एमएम पिस्तौल भी गैंगस्टरों के पास है। तुर्की निर्मित 9 एमएम पिस्तौल 5 से 10 लाख रुपये में मिलती है और गैंगस्टर इसका इस्तेमाल करते हैं। जिगाना एक स्वचालित पिस्तौल है जो तुर्की में तैयार की गई थी। जिगाना पिस्तौल में संशोधित ब्राउनिंग-प्रकार के लॉकिंग सिस्टम के साथ एक लॉक-स्लाइड शॉर्ट रीकॉइल ऑपरेटिंग तंत्र है। इसके अलावा इन पिस्टल में ऑटोमैटिक फायरिंग पिन ब्लॉक भी होता है। पंजाब में यह गैंगस्टरों के पास पाक से भेजा जा रहा है।
बैरेटा पिस्तौल
बैरेटा (छोटी पिस्तौल) मूल रूप से यूएसए में बनी 20 कैलिबर की सबसे छोटी पिस्तौल है। आसानी से मनुष्य की हथेली में आ जाने वाली यह पिस्तौल जेब में भी आराम से रखी जा सकती थी। एक के बाद एक लगातार आठ फायर इस पिस्तौल से किए जा सकते हैं। इसमें फायर करते समय झटका बिल्कुल नहीं लगता और निशाना ठीक बैठता है। इसे चलाते समय निशानेबाज को अपना सिर बचाकर रखना होता है अन्यथा पीतल का खोखा चोट पहुंचा सकता है। इसकी कीमत 10 लाख के करीब है लेकिन एजेंसियों के मुताबिक यह पिस्तौल गैंगस्टरों की पहली पसंद है क्योंकि यह आसानी से हाथ व जेब में आ जाती है।
ग्लोक 17
ग्लोक 17 नाम की पिस्तौल 9 एमएम की गोलियों पर चलती है, इसलिए इसकी एक मैगजीन में 17 गोलियां स्टोर हो जाती हैं। गोलियों के मामले में इससे बढ़िया पिस्टल कोई और नहीं हो सकती। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें 9 एमएम की कोई भी गोली लग सकती है। इससे फर्क नहीं पड़ता है कि वह गोली किस बंदूक के लिए बनाई गई है। गोली अगर 9 एमएम की है, तो ग्लोक 17 उसे बड़े ही आराम से चला सकती है। वक्त के साथ इस पिस्तौल में बहुत से बदलाव आए। अब इसमें लेजर, स्कोप, फ्लैशलाइट जैसी कई चीजें लगाईं जाती हैं। ग्लोक भी पंजाब के गैंगस्टरों के पास देखी गई है और ऐसी आशंका है कि सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में ग्लोक 17 पिस्टल इस्तेमाल की गई है।
आरपीजी
आरपीजी या रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड कंधे से दागे जाने वाले मिसाइल हथियार को कहते हैं। वैसे इसका इस्तेमाल अक्सर टैंक विरोधी हथियारों के रूप में किया जाता है लेकिन पंजाब में इस तरह के हथियार का पहुंचना काफी चौंकाने वाला है। कंधे से दागा गया मिसाइल हथियार एक रॉकेट-चालित ग्रेनेड विस्फोटक वारहेड से लैस रॉकेट लांच करता है। इसकी रेंज आमतौर पर 700 मीटर होती है। इस तरह के हथियार अफगानिस्तान जैसे संकटग्रस्त देश में पाए गए हैं। अब भारत में इनका इस्तेमाल कई सवाल खड़े करता है। इसका इस्तेमाल मोहाली इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर किया गया था।
वहीं, पंजाब पुलिस के पास भी कुछ आधुनिक हथियार हैं लेकिन उतनी संख्या में नहीं कि हर पुलिस मुलाजिम को उपलब्ध करवाया जा सके। पंजाब पुलिस के पास एके-47, थ्री नाट थ्री, एएलआर, एलएमजी के अलावा अमेरिका का बना हुआ रॉगर 38 बोर है। वहीं पंजाब पुलिस के पास कुल 82 हजार की नफरी पर 1.25 लाख हथियार हैं, जिनमें कोई खास बदलाव नहीं है।