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Jalandhar News: पठानकोट में 22,500 हेक्टेयर वन क्षेत्र को बचाने के लिए वन विभाग ने की तैयारी

Sat, 24 May 2025 10:39 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
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भीषण गर्मी के दौरान जंगल में आग की घटनाओं से निपटने लिए कंट्रोल रूम स्थापित
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24 घंटे सतर्क रहेंगे कर्मी: डीएफओ धर्मवीर दैडू

संवाद न्यूज एजेंसी
पठानकोट। पठानकोट में तापमान के लगातार बढ़ने और मौसम के अधिक शुष्क होने पर वन विभाग ने जंगल की आग के खतरे से निपटने लिए पूरी तैयारियां कर रखी हैं। आधिकारिक रूप से वन अग्नि का मौसम 15 अप्रैल से 30 जून तक रहता है। इस दौरान वनों में आग लगने की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं।
जंगल की आग न केवल हजारों एकड़ वन संपदा को नष्ट करती है, बल्कि जैव विविधता, मिट्टी की गुणवत्ता और जंगलों पर निर्भर समुदायों की आजीविका पर भी गंभीर असर डालती है। पठानकोट वन मंडल में तीन रेंज शामिल हैं और लगभग 22,500 हेक्टेयर वन क्षेत्र का प्रबंधन करता है, ने एक व्यापक और सक्रिय रणनीति अपनाई है। इसमें रियल-टाइम मॉनिटरिंग, फायर लाइन निर्माण, कंट्रोल रूम से समन्वय, उपग्रह आधारित सूचना प्रणाली और जनजागरूकता अभियान शामिल हैं। यह सभी प्रयास आग लगने से पहले और उसके तुरंत बाद त्वरित प्रतिक्रिया के उद्देश्य से किए गए हैं।
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वन विभाग ने पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण कर आग की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की है। इसमें पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे वन क्षेत्र चिन्हित किए हैं। इन क्षेत्रों के नक्शे और फोटोग्राफ तैयार कर लिए हैं ताकि आग लगने की स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके। वहीं, पठानकोट वन मंडल मुख्यालय में एक समर्पित 24x7 फायर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यहां स्टाफ शिफ्टों में तैनात है, जो आग लगने की सूचनाएं प्राप्त करता है और तुरंत संबंधित फील्ड स्टाफ तक जानकारी पहुंचाता है। जिओ ट्रैकर एप की सहायता से फील्ड स्टाफ की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। साथ ही एलईडी डिस्प्ले स्क्रीन को फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे लाइव अलर्ट्स की निगरानी की जाती है।
इस वर्ष 35 किलोमीटर की मौजूदा फायर लाइनों का रखरखाव किया गया है और अतिरिक्त 10 किलोमीटर नई फायर लाइनों का निर्माण मनरेगा योजना के अंतर्गत किया गया है। यह कार्य विशेष रूप से नए रोपण क्षेत्रों के चारों ओर किया गया है। वन विभाग को एफएसआई से एपग्रह आधारित आग लगने की सूचनाएं प्राप्त होती हैं। ये सूचनाएं स्थान सहित विस्तृत विवरण के साथ मिलती हैं। सभी फ्रंटलाइन स्टाफ, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (जेएफएमसी) के सदस्य और स्थानीय प्रतिनिधियों को एफएसआई पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है ताकि वे भी तुरंत अलर्ट प्राप्त कर सकें।
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डीएफओ की चेतावनी
वन मंडल अधिकारी धर्मवीर दैडू ने चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति जानबूझकर जंगल में आग लगाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 79 के तहत जंगल से सटे गांवों में तैनात हर सरकारी कर्मचारी को यह कर्तव्य निभाना होता है कि वह किसी भी वन अपराध की सूचना तुरंत विभाग को दे और आग बुझाने में सहायता करे। भले ही उसे आधिकारिक आदेश न मिला हो।


फोटो: 02 - धारकलां वन क्षेत्र में 10 हॉट स्पॉट रेंज।
फोटो: 02पी01 - वन विभाग में तैयार किए गए फायर इक्यूपमेंट।
फोटो: 02पी02 - वन संपदा को आगजनी से बचाने के लिए जंगलों की सफाई करते हुए कर्मचारी।
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