हलका बल्लूआना में बाढ़ के पानी से तबाह हुई नरमा की फसल।
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करीब एक माह पूर्व हुई भारी बरसात से हलका बल्लूआना के अधिकतर गांवों में बाढ़ जैसे हालात हैं। चारों ओर जलभराव से नरमा-कपास की फसल तबाह होने से किसानों का भारी नुकसान हुआ है। हालांकि कई दिनों से बरसात का सिलसिला रुका है, लेकिन बाढ़ का पानी अभी तक कम नहीं हो रहा, जिससे किसान चिंतित हैं।
भारी बरसात के चलते लंबी और गिदड़बाहा हलकों का पानी भी सेमनालों के माध्यम से बल्लूआना पहुंच रहा है, जिससे किसानों की हजारों एकड़ नरमा, कपास, हरी सब्जियां व हरे चारे की फसलें पूरी तरह से तबाह हो गई हैं। इतना ही नहीं बाढ़ के पानी से चारों ओर से घिरे कई गांवों में पशु चारे व पीने के पानी की भारी किल्लत पैदा हो रही है। खेतों में भरे बरसाती पानी में फसलों व खरपतवार के साथ छोटे-छोटे वन्य जीव भी मरने लगे हैं। इनके सड़ रहे शवों की बदबू से सांस लेना मुश्किल हो रहा है। सबसे अधिक चपेट में आए हलका के गांव मलूकपुरा, बहादुरखेड़ा, केराखेड़ा, रायपुरा, ढाणी सुच्चा सिंह, बहावलवासी तथा सरदारपुरा के किसानों ने सरकार पर आरोप कहा है कि पंजाब सरकार की नाकामी के कारण उनकी लाखों रुपये की फसलें तबाह हो गई हैं। कई दशक पूर्व अकाली सरकार के समय इस क्षेत्र के पानी की निकासी के लिए तीन सेमनाले बनाए गए थे, ताकि सेम और बरसात का पानी इन नालों से फाजिल्का के नजदीक सतलुज दरिया में पहुंच सके। लेकिन पंजाब सरकार ने दो वर्षों से इन सेमनालों की सफाई ही नहीं करवाई। जिससे इनमें बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर सरकार समय रहते इन सेम नालों की सफाई करवा देती तो किसान इस तबाही से बच जाते। करीब एक सप्ताह से बरसात न होने के बाद भी अब तक बाढ़ की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। क्योंकि जगह-जगह टूटे सेमनालों का पानी खेतों में आ रहा है, वहीं प्रशासन ने पानी निकासी के कोई प्रबंध नहीं किए हैं। किसानों का कहना है कि अगर जल्द खेतों में आ रहा सेमनालों का पानी न रोका गया तो गेहूं की बिजाई भी समय पर नहीं हो पाएगी। जिससे किसानों को दोगुना नुकसान झेलना पड़ सकता है। किसानों ने सरकार से शीघ्र ही समस्या की ओर ध्यान देने की मांग की है।