कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने किसान जत्थेबंदियों से रेल रोको आंदोलन पर दोबारा विचार करने की अपील की है। शनिवार को लुधियाना के बचत भवन में स्मार्ट गांव मुहिम के दूसरे फेज का शुभारंभ करने पहुंचे बाजवा ने कहा कि खेती बचाने के नाम पर यह आंदोलन नुकसान का कारण बन सकता है।
रेल लाइन बंद होने के कारण पंजाब में खाद्य पदार्थों की सप्लाई बंद हो गई है। वहीं थर्मल प्लांट में कोयले की सप्लाई नहीं हो पा रही। आने वाले दिनों में राज्य में बिजली सप्लाई में कमी आ सकती है।
स्मार्ट गांव मुहिम के बारे में बाजवा ने बताया कि पहले फेज में इस योजना के तहत पूरे पंजाब में 850 करोड़ रुपये खर्च किए गए। दूसरे फेज में प्रदेश के 13 हजार गांवों में विकास कार्य के लिए 2774 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि से लगभग 50 हजार विकास कार्यों को पूरा किया जाएगा।
इस मुहिम की शुरुआत करने का मुख्य मकसद गांवों को शहरों के बराबर सुविधाएं देना है। इस योजना में एक बड़ा फायदा यह है कि पंचायतें खुद तय कर रही हैं कि उनके गांव में किस तरह की सुविधा की जरूरत है। ग्रामीण एवं पंचायत विभाग केवल उन्हें इंजीनियर मुहैया करवा रही है।
देवीदासपुर के रेल ट्रैक पर बीते 24 दिनों से धरने पर बैठे किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के सदस्यों के साथ उनके बच्चे और परिवार की महिलाएं भी कृषि कानूनों के विरुद्ध प्रदर्शन में शामिल हुईं। महिलाएं केसरी दुपट्टे ओढे़ थीं। महिलाओं ने हाथों में बेलन लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं किसान संगठनों ने नए अमृतसर के नजदीक स्थित एक मॉल का भी घेराव किया। किसानों ने कहा की मॉल संस्कृति कॉरपोरेट घरानों की देन है, जिन्हें सरकारी संरक्षण मिला हुआ है। किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला भी फूंका।
मुक्तसर: गांव अकालगढ़ में किसानों ने अर्धनग्न होकर किया प्रदर्शन
कृषि कानूनों के विरोध में शनिवार को किसानों ने गांव हरिके कलां, खोखर, वड़िंग, गांव अकालगढ़ केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की। गांव अकालगढ़ में किसान अर्धनग्न होकर बच्चों सहित प्रदर्शन में उतर आए। किसान नेता हरफूल सिंह, हरचरन सिंह, हरदेव सिंह, निर्वेर सिंह, चरनजीत सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। जब तक केंद्र सरकार ये कानून रद्द नहीं कर देती तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
गांव हरिके कलां, खोखर व वड़िंग में किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले भी फूंके। किसान परिवार की महिलाएं व बच्चे भी प्रदर्शन में नजर आए। गांव हरिके कलां में किसानों ने कंधों पर कृषि संबंधी औजार भी उठा रखे थे। उधर, लघु सचिवालय के पास भाकियू एकता सिद्धपुर ग्रुप के जिला अध्यक्ष सुखदेव सिंह व जगदेव सिंह कानियांवाली के नेतृत्व में किसानों ने प्रदर्शन किया।
संगरूर: कृषि कानून के विरोध में किसान आंदोलन जारी
कृषि कानूनों के विरोध में विभिन्न किसान संगठनों का आंदोलन जारी है। शनिवार को किसान संगठनों ने जिले के विभिन्न स्थानों पर केंद्र सरकार के पुतले जलाए और नारेबाजी की। संगरूर में जहां किसान रेलवे ट्रैक पर डटे हैं, वहीं भाजपा नेता सतवंत सिंह पूनिया के निवास के सामने धरना जारी है।
इसके अलावा भवानीगढ़ में बठिंडा-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारतीय किसान यूनियन डकौंदा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाया गया। इस मौके पर यूनियन के ब्लाक अध्यक्ष कर्म सिंह बलियाल ने कहा कि किसान आंदोलन मोदी सरकार को काले कानून रद्द करने को मजबूर कर देगा।