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LS Elections: बड़ा मुद्दा... सिसक रही विश्व में डंका बजाने वाली जालंधर की खेल इंडस्ट्री, 'ड्रैगन' से भी परेशान

Sun, 28 Apr 2024 06:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा सुरिंदर पाल, जालंधर

सार

टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम की स्टिक से लेकर सचिन तेंदुलकर और एमएस धोनी जैसे खिलाड़ियों के मैच जिताऊ छक्के लगाने वाले क्रिकेट बैट जालंधर में ही बनते रहे हैं।
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चुनौती का दौर... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत में खेल से जुड़े कई बेहद शानदार पलों में जालंधर की हमेशा हिस्सेदारी होती रही है। टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम की स्टिक से लेकर सचिन तेंदुलकर और एमएस धोनी जैसे खिलाड़ियों के मैच जिताऊ छक्के लगाने वाले क्रिकेट बैट जालंधर में ही बनते रहे हैं। जालंधर की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री का इस कदर डंका बजता रहा है कि वेस्टइंडीज के महान खिलाड़ी विवियन रिचर्ड से लेकर क्रिस गेल तक जालंधर की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के दीवाने रहे हैं।

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दरअसल, पाकिस्तान के सियालकोट से विस्थापित होकर आए हिंदू परिवारों ने जालंधर आकर नए सिरे से खेल उद्योग की स्थापना ही नहीं की, बल्कि हुनर का लोहा भी मनवाया। पंजाब का जालंधर शहर देश के सबसे बड़े स्पोर्ट्स मैन्युफेक्चरिंग हब के तौर पर जाना जाता रहा है, जहां प्रो-ग्रेड बॉक्सिंग ग्लव्स से लेकर गली क्रिकेट खेलने के लिए इस्तेमाल होने वाली गेंद तक सब कुछ तैयार किया जाता है, लेकिन विश्व में डंका बजाने वाली यह इंडस्ट्री अब सिसक रही है। 
जालंधर में करीब 2,700 छोटी-बड़ी खेल इकाइयां हैं। शहर की सबसे मशहूर बस्ती नौ स्पोर्ट्स मार्केट में ही क्रिकेट बैट, लेदर बॉल, बैडमिंटन रैकेट, शटलकॉक इत्यादि का बड़े
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पैमाने पर कारोबार होता था। अब यह उद्योग काफी हद तक बंद हो चुके हैं। सरकारें आईं और गईं मगर इस उद्योग के अच्छे दिन नहीं आए। बड़े-बड़े उद्योगों के अलावा थोड़ा बहुत काम करने वाले कारोबारियों ने तो खुद को संभाल लिया, लेकिन छोटे उद्योग मंदी को सह नहीं सके और धीरे-धीरे इनमें तालाबंदी होने लगी। उत्तर प्रदेश की सरकार ने खेल उद्योग को जबरदस्त प्रोत्साहन दिया और वैट माफ कर दिया। पांच प्रतिशत वैट माफ होने से जालंधर से खेल उद्योग जालंधर से मेरठ शिफ्ट होने लगा। वहीं जेएंडके ने अपनी इंगलिश विलो लकड़ी, जिसका इस्तेमाल बैट बनाने के लिए होता है, उसको कठुआ में भेजकर पंजाब की सीमा पर उद्योग लगाने शुरू कर दिया। रही सही कसर कोरोना ने कर दी और इंडस्ट्री की तोड़ दी। 

आलम यह है कि दो दशक पहले जो खेल उद्योग 3,000 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार करता था, वर्तमान में 1,900 करोड़ रुपये तक सिमट चुका है। बाकी कसर चीन के माल ने पूरी कर दी। दानिशमंदा इलाके, भार्गव कैंप और बस्ती नौ स्पोर्ट्स मार्केट के आसपास लगते इलाकों में छोटी जगहों पर भी यह काम बहुतायत में होता था, जो अब बंद हो चुका है।

खेल उद्योग को नहीं मिला स्किल व आरएंडडी सेंटर
जालंधर के खेल उद्योग को स्किल सेंटर और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) सेंटर न मिलने के कारण भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। समय-समय की सरकारें भी खेल उद्योग के साथ दो दशक से सिर्फ ‘खेल’ ही कर रही हैं। सेंटर खोलने की मांग को लेकर खेल उद्यमी सरकार के प्रतिनिधियों से भी कई बार मिल चुके हैं, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने न तो उद्योग की सुध ली और न ही स्किल सेंटर का निर्माण करवाया। सरकारी नीतियों के कारण ही हजारों उत्पादक अब ट्रेडिंग के कारोबार में बदल चुके हैं।

लेबर व कच्चे माल की कमी के कारण इंडस्ट्री चीन से माल तैयार करवाकर अपना मार्का वहीं से लगवाकर आगे माल बेच रही है। जम्मू-कश्मीर से कश्मीरी विलो की लकड़ी पर पंजाब में पाबंदी है। इस कारण जालंधर की बैट इंडस्ट्री अब कठुआ में स्थानांतरित हो गई है। पहले जालंधर में 350 बैट बनाने वाली यूनिट थी, लेकिन अब सिर्फ करीब 80 यूनिट बची हैं। बैट तैयार करने के लिए कच्चा माल जैसे बैट का हैंडल, धागा, ग्रिप, स्टिकर इत्यादि जालंधर से कठुआ जाता है और वहां से बैट तैयार होकर यहां आता है। 



दम तोड़ देगी घरेलू इंडस्ट्री : धीर
शटलकॉक इंडस्ट्री को बतख के पंख पर लगे बैन के कारण भी मुसीबत का सामना करना पड़ा था। अब यहां पर मुर्गी के पंखों की ही शटलकॉक ही बनाई जाती हैं। खेल उद्योग संघ, पंजाब के कन्वीनर रविंदर धीर ने कहा कि खेल सामान बनाने वाली घरेलू इंडस्ट्री को लगातार नजरअंदाज ही किया गया है। पंजाब सरकार ने रवैया नहीं बदला तो घरेलू इंडस्ट्री दम तोड़ देगी। 
स्किल्ड लेबर की  दरकार : कोहली
स्पोर्ट्स एंड टॉय एसोसिएशन के चेयरमैन संजय कोहली ने कहा कि आरएंडडी सेंटर व स्किल सेंटर न होने से बैट एवं लेदर बॉल इंडस्ट्री दूसरे राज्यों में शिफ्ट हो गई। जालंधर की इंडस्ट्री विश्व भर में खेल सामान निर्यात करती है, लेकिन लेबर की सही ट्रेनिंग न होने से लेदर बॉल इंडस्ट्री अब मेरठ में शिफ्ट हो गई। शहर में स्किल सेंटर होगा तो क्वालिटी के उत्पाद तैयार होंगे और स्किल्ड लेबर तैयार होगी।       

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