रेल कोच फैक्टरी में प्लास्टिक वेस्ट को तारकोल में मिलाकर रोड पैचवर्क करने में जुटे कर्मी।
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रेल कोच फैक्टरी में प्लास्टिक वेस्ट से रोड बनाने की पहल की है। आरसीएफ सूबे की इस तरीके से रोड बनाने वाला पहला यूनिट बन गया है। फिलहाल आरसीएफ में फैले सड़कों के जाल के पैचवर्क का काम शुरू किया गया है। उम्मीद है कि आरसीएफ के अंदर बनने वाले तमाम रोड इसी तरीके से बनेंगे। इसमें कोच निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण की पैकिंग में प्रयोग प्लास्टिक वेस्ट को प्रयोग में लाया गया है।
आरसीएफ के शहीद भगत सिंह मार्ग पर कपूरथला की सरवन कुमार एंड कंपनी की ओर से तारकोल में प्लास्टिक वेस्ट को पिघला प्लांट में मिक्स करने के बाद पैचवर्क का काम शुरू किया गया है। पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। इसके लिए पहले प्लास्टिक वेस्ट को पहले छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पिघलाकर तारकोल के साथ मिक्स करके फिर अन्य सामग्री डालकर सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जाता है। इस समय आरसीएफ में हर छह माह बाद ट्रेन के डिब्बों में निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणेें व वस्तुओं की पैकिंग से करीब 1500 क्विंटल प्लास्टिक पैकिंग मटीरियल इकट्ठा होता है। इस प्लास्टिक वेस्ट को इस्तेमाल करने की तरफ पहलकदमी की है। आरसीएफ के पीआरओ जितेश कुमार बताते हैं कि यह कदम पर्यावरण संरक्षण के तौर पर उठाया गया है। फिलहाल जहां पैकिंग वेस्ट को इस्तेमाल में लाया जा रहा है। जल्द ही घरों से निकलने वाले पॉलीथिन मैटीरियल को भी शामिल करेंगे। अभी तो केवल 30-40 मीटर तक खराब रोड पर पैचवर्क का काम शुरू किया गया है। लेकिन इसके बाद आरसएफ में सड़कें इसी तरीके से बनेंगी। उन्होंने दावा किया है कि इससे सड़कों की लाइफ बढ़ेगी और सर्दियों में लचीलापन भी बढ़ जाता है। गर्मियों में जहां आम तारकोल की सड़क 40 तापमान तक सहन कर सकती है, यह रोड 50 तक सहन करने की सामर्थ्य रखती है।