चंडीगढ़। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली पर सख्त रुख अपनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को निर्देश दिया है कि हर जिला अस्पताल में कम से कम एक सीटी स्कैन मशीन, एक एमआरआई मशीन और पर्याप्त आईसीयू सुविधा तत्काल उपलब्ध कराई जाए। अदालत ने डॉक्टरों की भारी कमी पर भी गंभीर चिंता जताते हुए रिक्त पदों को भरने के लिए तुरंत भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष भीषम किंगर द्वारा दाखिल जनहित याचिका सुनवाई के लिए पहुंची थी। खंडपीठ ने कहा कि आधुनिक दौर में सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी सुविधाएं लक्जरी नहीं बल्कि जिला अस्पतालों की बुनियादी जरूरत हैं। नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की सांविधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है।
मालेरकोटला जिला अस्पताल में आईसीयू सुविधा तक नहीं होने पर अदालत ने हैरानी जताई है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों की खरीद, स्थापना और संचालन अस्पताल प्रशासन के नियंत्रण में होना चाहिए। अदालत ने निजीकरण की प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं जैसी मूलभूत जिम्मेदारियां निजी एजेंसियों के भरोसे छोड़ना सरकार के सांविधानिक दायित्व से पीछे हटने जैसा है।
डॉक्टरों के पद खाली
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पंजाब में मेडिकल ऑफिसर (जनरल) के 2042 और स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के 835 पद खाली पड़े हैं। वहीं हरियाणा सरकार अलग-अलग श्रेणियों में रिक्त पदों का स्पष्ट ब्योरा तक अदालत में पेश नहीं कर सकी। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। खंडपीठ ने दोनों राज्यों को निर्देश दिया कि रिक्त पदों को भरने के लिए तुरंत विज्ञापन जारी किए जाएं और अगली सुनवाई से पहले अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की जाए।