कमिश्नरेट पुलिस की टीम ने एटीएम को लूटने वाले गिरोह के पांच सदस्यों को काबू किया है। पुलिस ने उनके पास से 11 लाख नगदी के अलावा हथियार बरामद किए हैं।
गिरोह के सदस्यों ने चार एटीएम से 56 लाख रुपये की राशि लूटी थी। इसमें से वे 45 लाख खर्च कर चुके थे। एक आरोपी फरार है, जो दुबई जा चुका है।
पुलिस कमिश्नर यूरिंदर सिंह हेयर ने बताया कि डिवीजन नंबर सात के एसएचओ नवदीप सिंह को गुप्त सूचना मिली, जिसकी बिनाह पर छापामारी कर पांच आरोपियों को काबू कर लिया गया।
उनकी पहचान कमल कुमार बब्बू निवासी सोफी पिंड, सन्नी हंस निवासी अवतार नगर जालंधर, दीपक कुमार दीपू निवासी जालंधर कैंट, मलकीयत सिंह निवासी कांजली कपूरथला, कुलदीप कुमार सन्नी निवासी नवां पिंड बाठा कपूरथला के रूप में हुई। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे एटीएम से लूटपाट की योजना तैयार कर रहे थे।
आरोपियों के पास से रिवाल्वर, एक दोनाली के अलावा 11 लाख की नगदी बरामद की गई है। कमिश्नर ने बताया कि इस गिरोह का एक सदस्य बावा उर्फ राजा अब दुबई जा चुका है।
आरोपी गैस वेल्डिंग के जरिये एटीएम मशीन को काट लेते थे और पैसा निकाल लेते थे। उन्होंने बताया कि इस गिरोह ने मकसूदां जालंधर स्थित स्टेट बैंक के एटीएम, यूको बैंक के सूर्या इंक्लेव स्थित एटीएम, बस्ती बावा खेल स्थित यूनियन बैंक के एटीएम और अर्बन एस्टेट स्थित इलाहाबाद बैंक के एटीएम को निशाना बनाया था।
कमिश्नर हेयर ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि गिरोह के सदस्यों ने काफी योजनाबद्ध ढंग से गैंग गठित किया था। गिरोह के सदस्य कमल कुमार ने जमा दो कक्षा पास कर रखी थी। 2008 में उसने एआईपीएल कंपनी में एटीएम कैश लोडर की नौकरी ज्वाइन की थी। वहां से उसको दस हजार रुपये की पगार मिलती थी।
इस तरह से सन्नी हंस व दीपक ने भी एटीएम कैश लोडर की नौकरी ज्वाइन कर रखी थी। मलकीयत सिंह दुबई से लौटा था और उसने कैश लोडर कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रखी थी और कमल व सन्नी से उसकी पहचान थी। मलकीयत सिंह की पहचान बावा उर्फ राजा से थी, जिसकी पहचान में प्रोफेशनल वेल्डर कुलदीप भी था।
इन सभी ने गिरोह बना लिया। कमल, सन्नी और दीपक को पता होता था कि किस एटीएम में कितना कैश है। वे सप्ताह के अंत वाले दिन एटीएम को निशाना बनाते थे। पुलिस कमिश्नर यूरिंदर सिंह हेयर ने बताया कि जालंधर और आसपास के इलाकों में एटीएम लूट की वारदात बढ़ गई थी। इसे लेकर कमिश्नर ने एक ज्वाइंट टीम का गठन किया।
इसमें एडीसीपी विवेकशील सोनी, एसीपी करणवीर सिंह व नवदीप सिंह को शामिल किया गया था। एटीएम को जिस ढंग से काटा गया था, उससे शक था कि कोई कंपनी का मुलाजिम गिरोह के साथ मिला हुआ है। उन एटीएम को ही निशाना बनाया जाता है, जिसमें काफी पैसा होता है। ऐसे गिरोह के सदस्यों को बेनकाब करने के लिए कैश लोडर कंपनी के तमाम पुराने मुलाजिमों की सूची मांगी गई, जिसमें कई नाम संदिग्ध थे।