सेहत मंत्री चाहे सिविल अस्पतालों में बेहतर इलाज का दावा कर रहे हैं,
लेकिन हालात काफी खराब हैं। वहीं सिविल अस्पताल में इलाज करवाने आई एक
गर्भवती महिला की डॉक्टरों ने दो दिन तक कोई सुध ही नहीं ली। बाद में सिविल
अस्पताल प्रबंधन ने उक्त महिला के केस को गंभीर बता उसे अमृतसर रेफर करने
को कह दिया।
पीड़िता के पिता मिश्री लाल ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी
लगातार दो दिन तक अस्पताल में तड़पती रही। उनके विरोध के बाद अस्पताल के
डॉक्टरों को उक्त महिला का इलाज करना ही पड़ा। रविवार को ज्योति नगर की
रहने वाली एक महिला को उसके परिजनों ने सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया।
महिला के पेट में आठ माह का बच्चा था, जो मर चुका था। मुन्नी देवी के
अभिभावकों ने सिविल अस्पताल के डॉक्टरों से अपील की कि वह बच्चे को निकाल
कर उनकी बेटी की जान बचा लें।
वहीं दो दिन तक सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने
महिला मरीज की सुध नहीं ली। इसके बाद पीड़ित महिला के परिजनों ने सिविल
सर्जन आरएल बस्सन को इस बारे में बताया। उन्होंने ने भी स्टाफ को मरीज का
इलाज करने को कहा, लेकिन स्टाफ व डॉक्टर ने उन्हें भी केस गंभीर होने का
कहकर मरीज को अमृतसर शिफ्ट करने को कह दिया। परिजनों के विरोध पर अस्पताल
के डॉक्टरों को महिला का इलाज करना पड़ा। बाद में महिला का इलाज 30 मिनट
में कर दिया गया। सिविल सर्जन आरएल बस्सन का कहना है कि उन्होंने मरीज की
हालत देखकर डॉक्टरों को रात को ही इलाज के लिए कह दिया था। डॉक्टर ने महिला
के इलाज में कोताही नहीं बरती है। महिला अब पूरी तरह से ठीक है।