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म्र 13 साल, धंधा वाहन चोरी का,

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उम्र 13, धंधा वाहन चोरी का, सपना-जल्द अमीर बनने का
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नाबालिगों के गिरोह ने चुराए आठ वाहन, पुलिस को खूब छकाया, वाहनों को बेचने की फिराक में थे
अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। उम्र 13 साल पिता पेशे से पेंटर दूसरे की उम्र 16 साल पिता पेशे से धोबी व तीसरे की उम्र 15 साल। तीनों ने मिलकर एक ऐेसा शातिर गिरोह बनाया, जिसने पुलिस को खूब छकाया। गिरोह के शातिर बच्चों ने शहर में आठ दोपहिया वाहन चोरी कर लिए और उनको सुनसान इलाके में खड़ा कर दिया, ताकि वक्त आने पर बेच सकें। लेकिन बस्ती बावा खेल की पुलिस ने तीनों शातिर बच्चों को दबोच लिया और होशियारपुर की जुवेनाइल जेल में भेज दिया।
तीनों बच्चों के कारनामे सुनकर एसपी वेस्ट सर्बजीत सिंह भी दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर हो गए। तीनों के पास एक मास्टर चाबी थी, जिसका इस्तेमाल कर वह वाहन चोरी करते थे। बस्ती बावा खेल के एसएचओ सुखबीर सिंह ने नाकेबंदी की थी, इस दौरान वाहन लेकर जा रहे बच्चों को तलाशी के लिए रोका नंबर प्लेट पर गलत नंबर लगा पाया। वाहन सॉफ्टवेयर से चेक करने पर तस्वीर साफ हो गई कि वाहन चोरी का है और नंबर प्लेट गलत लगाई है। तीनों बच्चों को हिरासत में ले लिया गया तो पता चला कि तीनों की उम्र 18 साल से कम है। तीनों बच्चे जल्दी में अमीर बनने की चाहत में वाहन चोरी के धंधे में उतर आए थे। एसीपी सर्बजीत सिंह के मुताबिक दो बच्चे तो अपने पिता के साथ कामकाज में हाथ बंटाते हैं, जबकि तीसरा कोई काम नहीं करता।
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तीनों के सपने काफी ऊंचे थे और इसी वजह से उन्होंने वाहन चोरी का रास्ता अख्तियार कर लिया। पहले तो वाहनों की तलाश करते, जिसका मालिक दोपहिया वाहन की चाबी लगी छोड़ देता। बाद में बच्चों ने एक मास्टर की तैयार कर ली, जिस वाहन पर लग जाती उसे लेकर फुर्र हो जाते। शहर में दनदनाती वारदातों से पुलिस चिंतित थी और इन बच्चों के कारनामे थे कि एक के बाद एक आठ वाहन चोरी कर लिए।
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