नगर निगम जालंधर में चल रही पार्षद-एसटीपी विवाद की जांच करने शिअद हाईकमान ने रविवार को जालंधर शिअद के इंचार्ज एवं पूर्व मंत्री सेवा सिंह सेखवां को भेजा।
शाम पांच बजे सेखवां सर्किट हाउस में पहुंच गए। उन्होंने इस विवाद से जुड़े अहम शख्स सीनियर डिप्टी मेयर कलमजीत सिंह भाटिया व पार्षद रवि महेंद्रू की शिकायतों को सुना।
इसके साथ मुख्य संसदीय सचिव केडी भंडारी, अकाली विधायक परगट सिंह, वरिष्ठ भाजपा नेता मोहिंदर भगत, अकाली नेता कुलदीप सिंह ओबराए की बात का जाना गया।
करीब ढाई घंटे तक सभी की बातों को सुनने के बाद सेखवां ने मीडिया को बताया कि यह इगो प्रॉब्लम है। इसका फैसला सीएम प्रकाश सिंह बादल करेंगे।
उन्होंने सभी की बातों को सुन लिया और इसकी सारी रिपोर्ट तैयार कर सीएम को सौंप देंगे। सेखवां ने इस विवाद से जुड़े हर एक शख्स को कहा कि जब तक सीएम का फैसला नहीं आता कोई भी मीडिया के सामने कोई बयान नहीं देगा।
कमलजीत सिंह भाटिया ने कहा कि निगम के 22 पार्षदों ने सामूहिक हस्ताक्षर कर एसटीपी शक्ति सागर भाटिया के ट्रांसफर की मांग की है।
ये बात सुनते ही अकाली पार्षद जत्थेदार प्रीतम सिंह भड़के उठे। उन्होंने उनसे झूठ न बोलने का आग्रह किया। साथ ही 22 पार्षदों ने हस्ताक्षर नहीं किए।
प्रीतम सिंह ने सेखवां से साफ कहा कि धक्केशाही बर्बाद नहीं की जाएगी। सेखवां ने प्रीतम सिंह को शांत करवाते कहा कि इस सारे मामले का फैसला सीएम करेंगे।
इस दौरान जिला प्रधान गुरचरण सिंह चन्नी, जत्थेदार प्रीतम सिंह, अकाली नेता परमजीत सिंह रेरू उपस्थित थे।
इस दौरान सीनियर डिप्टी मेयर कमलजीत सिंह भाटिया नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार और काले कारनामों के सभी सबूत इकट्ठा कर लाए थे। उन्होंने ये सारे सबूतों की कॉपी सेवा सिंह सेखवां को सौंपी।
कमलजीत सिंह भाटिया ने कहा कि मेयर को सौंपे मांगपत्र में 16 पार्षदों ने एसटीपी शक्ति सागर भाटिया से माफी मंगवाने और ट्रांसफर करने की मांग पर हस्ताक्षर किए थे।
अगर मांगपत्र में 10 पार्षदों के हस्ताक्षर मिले तो वे अपने पद के साथ राजनीति से इस्तीफा दे देंगे।