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कैप्टन का फगवाड़ा प्लान भाजपा पर भारी, भाजपा गुटबाजी में फंसी रही, कैप्टन ने तीर मारा

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कैप्टन का मिशन फगवाड़ा भाजपा पर भारी पड़ा है। कैप्टन ने कांग्रेस की गुटबाजी को विराम देकर नया तीर चलाया, जबकि भाजपा की गुटबाजी चरम पर रही। जिसका नतीजा यह हुआ कि आरएसएस के चेहरे उम्मीदवार राजेश बाघा बुरी तरह से पराजित हो गए और कांग्रेस के बीएस धालीवाल ने अपना परचम लहराकर 12 साल बाद भाजपा से सीट छीन ली।
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कांग्रेस पिछले तीन विधानसभा चुनाव सिर्फ गुटबाजी के कारण हारती आई है। कांग्रेस की तरफ से कभी जोगिंदर सिंह मान तो कभी बलवीर राजा सोढी को टिकट दी गई। दोनों गुट एक दूसरे की टांग खिंचाई करते रहे नतीजतन भाजपा के उम्मीवार फगवाड़ा में जीतते रहे। 2007 से लेकर 2017 तक भाजपा के उम्मीदवार ने जीत हासिल की। इस बार कैप्टन ने सोढी व मान की गुटबाजी को विराम देकर नए चेहरे बलविंदर सिंह धालीवाल मैदान में उतार दिया। धालीवाल आईएएस अधिकारी थे और उनके नाम पर जोगिंदर मान व सोढी दोनों सहमत हो गए। कांग्रेस ने एक जुट होकर फगवाड़ा में प्रचार किया। जोगिंदर मान खुद प्रचार में डटे रहे।
वहीं भाजपा में गुटबाजी हावी हो गई। फगवाड़ा में सोम प्रकाश अपनी पत्नी अनीता सोम प्रकाश को टिकट दिलाना चाहते थे जबकि पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री विजय सांपला अपने बेटे साहिल सांपला को। पर आरएसएस ने दोनों को छोड़कर अपने चहेते राजेश बाघा को टिकट दी। इसका नतीजा यह हुआ कि बाघा गुटबाजी में बुरी तरह से उलझ गए। शुरू से लेकर अंत तक वह गुटबाजी को सुलझाते हुए खुद उलझ गए।
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