-2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जमीन तैयार कर ही पार्टी
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सुरिंदर पाल
जालंधर। पंजाब में दलितों की आबादी करीब 33 फीसदी है जो अन्य राज्यों से सबसे ज्यादा है। ग्रामीण क्षेत्र में यह आबादी 37 फीसदी तक हो जाती है। दोआबा क्षेत्र के कई इलाकों में यह अनुपात 45 से 50 फीसदी तक चला जाता है। दलितों का समूचा वोट कभी भी किसी एक पार्टी को नहीं पड़ा है। इसके कई कारण हैं। पंजाब में दलित भाईचारा 39 जातियों में बंटा हुआ है। उनके आपसी हित भी टकराते हैं। पंजाब में दलितों की मुख्य जातियों में रामदासिये, रविदासिये, मजहबी, वाल्मीकि, भगत अथवा कबीरपंथी प्रमुख हैं।
पंजाब के बड़े क्षेत्र मालवा में जाटव और मजहबी सिख बड़ी तादाद में हैं। माझा क्षेत्र में ज्यादातर मजहबी सिख और ईसाई दलित हैं। पंजाब में भाजपा गांवों की तरफ जाने के लिए मजहबी सिख, वाल्मीकि समाज और रविदासिया वोट पर नजर लगाए हुए हैं। पंजाब में राजनीति में किसान आंदोलन के बाद काफी बदलाव आया है। गांवों में जाट व जमींदारों ने भाजपा से किनारा किया है। यह वोट पहले भी कांग्रेस या अकाली दल के खाते में जाता था। गांव में जितनी आबादी जाटों की है उतनी ही दलितों की है।
गांवों में जाट व जमींदार भाजपा का हाथ नहीं पकड़ रहे हैं तो भाजपा की नजर अब दलितों व गरीबों पर है। इनमें अधिकतर खेत मजदूर व दिहाड़ीदार हैं। पंजाब की 117 सीटों में से 34 (एक तिहाई) सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। आरक्षित सीटों में, 34 आरक्षित सीटों में से आठ सीटें ऐसी हैं, जहां पर 40 फीसदी से अधिक दलित मतदाता हैं। बंगा (49.71 फीसदी), करतारपुर (48.82 फीसदी), फिल्लौर (46.85 फीसदी), आदमपुर (46.16 फीसदी), चब्बेवाल (45.36 फीसदी), शाम चौरासी (44.6 फीसदी), भोआ (42.48 फीसदी) और मलोट (40.62 फीसदी) वोट है। यह सभी ग्रामीण इलाके हैं, लिहाजा भाजपा ऐसे इलाकों में केंद्र सरकार की नीतियों का गुणगान कर वोट को बटोरने की तैयारी कर रही है।
इन योजनाओं का प्रचार कर रही प्रचार
भाजपा गांवों में जाकर यह प्रचार कर रही है कि देश में 12 करोड़ शौचालयों ने खुले में शौच की मजबूरी से मुक्ति दिलाई है। जल जीवन मिशन से 12 करोड़ नए घरों में नल से जल पहुंचने लगा है। महिलाओं का जीवन आसान हुआ है। पीएम किसान सम्मान निधि से 10 करोड़ छोटे किसानों को सीधी आर्थिक सहायता मिली है। पिछले 11 वर्ष में 25 करोड़ से ज्यादा हमारे ही गरीब भाई-बहनों ने गरीबी के खिलाफ जंग लड़ी और विजयी होकर गरीबी से बाहर निकले हैं। अब वो नए मध्यम वर्ग का हिस्सा बने हैं। आयुष्मान भारत योजना से 50 करोड़ गरीबों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिला है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना से हर थाली में भरपेट अनाज सुनिश्चित हुआ है। जनधन योजना से पहली बार 50 करोड़ से ज्यादा गरीबों के लिए बैंक का दरवाज़ा खुला है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि हम गांवों में कैसे जा सकते हैं? पंजाब में किसानों में अभी तक भाजपा अपना स्थान नहीं बना पाई है। पंजाब में उपचुनाव में जहां जहां हमने ग्रामीण इलाकों में चुनाव लड़ा, वहां करारी हार हुई है। हमें गांवों की तरफ जाने के लिए कोई रोड मैप तो तैयार करना ही होगा।