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भाजपा की नई टीम से साफ हुआ 2027 का ब्लूप्रिंट: बाहरी नेताओं पर बड़ा दांव, दलित-जट सिख समीकरण साधने का प्रयास

Tue, 04 Aug 2026 06:32 PM IST
शाहिल शर्मा सुरिंदर पाल, जालंधर

सार

नई कार्यकारिणी में मालवा क्षेत्र को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व मिला है, जो पंजाब की राजनीति में निर्णायक है। प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों स्वयं मालवा और जट सिख पृष्ठभूमि से आते हैं।
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केवल सिंह ढिल्लो, बीजेपी पंजाब अध्यक्ष - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 2 अगस्त को प्रदेश भाजपा की नई कार्यकारिणी की घोषणा की। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मंजूरी के बाद यह टीम 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। नई कार्यकारिणी चुनावी जीत, सामाजिक संतुलन और प्रभावशाली चेहरों पर केंद्रित है। पार्टी ने विधानसभा चुनाव लड़ने वाले नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से दूर रखा है।
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अन्य दलों से आए नेताओं को मिले शीर्ष पद
भाजपा ने पहली बार कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल से आए नेताओं को संगठन के शीर्ष पदों पर स्थापित किया है। यह दर्शाता है कि पार्टी अब पारंपरिक कैडर के बजाय जनाधार वाले नेताओं के सहारे चुनावी युद्ध लड़ना चाहती है। नई टीम में 12 प्रदेश उपाध्यक्ष, 5 प्रदेश महासचिव और 12 प्रदेश सचिव नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा विभिन्न मोर्चों के अध्यक्ष तथा जिला अध्यक्षों की भी नियुक्तियां हुई हैं। इस विस्तार का उद्देश्य वैचारिक विस्तार से अधिक चुनावी जीत पर ध्यान केंद्रित करना है। पार्टी ने मालवा, दोआबा और माझा जैसे प्रमुख क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दिया है।

नए चेहरों पर भाजपा का दांव
नई टीम में अन्य दलों से आए कई प्रमुख नेता शामिल हैं। जालंधर से पूर्व सांसद सुशील कुमार रिंकू को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है, जो दोआबा में दलित समाज के प्रभावशाली चेहरे हैं। पूर्व कांग्रेस नेता तेजिंदर सिंह बिट्टू और अश्वनी सेखड़ी भी प्रदेश उपाध्यक्ष बने हैं, जिनकी नियुक्तियां कांग्रेस के वोट बैंक और माझा क्षेत्र में भाजपा की मौजूदगी मजबूत करने के लिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की बेटी जय इंदर कौर को महिला मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। आम आदमी पार्टी छोड़कर आए पूर्व विधायक शीतल अंगुराल एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने हैं। यह पंजाब की दलित आबादी को साधने का महत्वपूर्ण दांव है।
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क्षेत्रीय संतुलन और चुनावी रणनीति
नई कार्यकारिणी में मालवा क्षेत्र को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व मिला है, जो पंजाब की राजनीति में निर्णायक है। प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों स्वयं मालवा और जट सिख पृष्ठभूमि से आते हैं। पूर्व अकाली नेता परमिंदर सिंह बराड़ को प्रदेश महासचिव बनाया गया है, जबकि रवि करन सिंह काहलों और रंजीत सिंह गिल प्रदेश उपाध्यक्ष बने हैं। इन नियुक्तियों से भाजपा अकाली दल के पारंपरिक सिख वोट बैंक में हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब शहरी हिंदू पार्टी की छवि से निकलकर ग्रामीण पंजाब, किसान समाज और जट सिख वर्ग में स्वीकार्यता बढ़ा रही है। दोआबा में दलित बहुल सीटों पर सीधी चुनौती देने के लिए रिंकू और अंगुराल को बड़ी जिम्मेदारियां दी गई हैं।

पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी और संतुलन
नई टीम में दलबदल कर आए नेताओं का दबदबा है, जिससे पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष की चर्चा है। वरिष्ठ नेता सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल का इस्तीफा इसी असंतोष की अभिव्यक्ति माना जा रहा है। हालांकि, भाजपा ने पुराने कैडर को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया है। अनिल सरीन और राजेश बाघा को प्रदेश महासचिव बनाया गया है, जो लंबे समय से संगठन से जुड़े हैं। सुरजीत कुमार ज्याणी और डॉ. सुभाष शर्मा प्रदेश उपाध्यक्ष बने हैं, जो पारंपरिक कार्यकर्ताओं को संदेश देते हैं कि संगठन की मूल संरचना पुराने नेतृत्व के हाथों में रहेगी। संगरूर में सरजीवन जिंदल को जिला अध्यक्ष नियुक्त कर पार्टी ने संगठनात्मक विवादों को समाप्त करने की कोशिश की है, क्योंकि यदि पुराने और नए नेताओं के बीच संतुलन नहीं बना तो यह रणनीति चुनौती बन सकती है।
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