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विश्व विख्यात भजन लेखक बलबीर निर्दोष का देहांत, लिखा था- कभी फुरसत हो तो जगदम्बे...

Tue, 25 Feb 2020 10:14 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जालंधर(पंजाब)
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बलबीर निर्दोष - फोटो : ??????
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विश्व विख्यात भजन लेखक बलबीर निर्दोष का सोमवार को स्वर्गवास हो गया। निर्दोष पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार 12 बजे किशनपुरा श्मशानघाट में किया जाएगा।
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कोटली थान सिंह में 30 दिसंबर, 1935 को रामलाल और द्वारकी देवी के घर पैदा हुए बलबीर निर्दोष ने हजारों की संख्या में भजन और गीत लिखे। इन गीतों को लता मंगेशकर, सोनू निगम, अलका याज्ञनिक, अनुराधा पौड़वाल और उनके सबसे करीबी नरेंद्र चंचल ने आवाज दी।

सादी जिंदगी जीने वाले निर्दोष 1992 में अपनी पत्नी के निधन के बाद से गरीबी से जूझ रहे थे। इस दौरान उन्होंने सोनू निगम की कैसेट के लिए भेटें लिखीं। इसमें अपने दर्द को ‘कभी फुरसत हो तो जगदम्बे, निर्धन के घर भी आ जाना’ के साथ बयां किया।
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इसके बाद गुलशन कुमार ने इन्हें पुरस्कार के रूप में कार भी भेंट की। 1993 में नरेंद्र चंचल के उस्ताद चमन लाल जोशी के निधन के बाद वह उनके साथ भी जुड़ गए। नरेंद्र चंचल के लिए बलबीर ने ‘मां ने आप बुलाया है हुन मौजां ही मौजां’ सहित कई नामी भेटें लिखीं।

निर्दोष ने सिद्ध शक्तिपीठ मां त्रिपुरमालिनी के दरबार में चालीसा, आरती और अरदास का लेखन भी किया है। 40 से अधिक अमृतवाणियां लिखकर इतिहास रचने वाले जालंधर के निर्दोष की लेखनी का बॉलीवुड भी मुरीद रहा है। लता मंगेशकर की भेटों की कैसेट ‘जगराता’ की सभी 20 भेटें बलबीर निर्दोष ने ही लिखी थी।
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