पठानकोट के ढाकी सैदां के चक्की दरिया में घड़ियाल देखे जाने से दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने आस पड़ोस के सभी गांवों व इलाकों को सतर्क किया है कि चक्की दरिया के पास सावधानी बरतें। वहीं वन्य जीव विभाग ने घड़ियाल देखे जाने पर खुशी जताई है। अधिकारियों का कहना है कि पठानकोट और विभाग के लिए गर्व की बात है कि 50-60 साल से विलुप्त प्रजाति का जीव दिखाई दिया है। अब वन्य जीव विभाग की टीम ढाकी सैदां में जाकर घड़ियालों की संख्या का सर्वे करेगी और लोगों को इनके व्यवहार के प्रति जागरूक भी करेगी। दरअसल, ढाकी सैदां सरपंच गगनदीप ने बताया कि वीरवार को सुबह कुछ ग्रामीण चक्की दरिया किनारे गए थे। उन्होंने दरिया के पानी में घड़ियालों की हलचल देखी। सरपंच ने कहा कि लोगों में डर का माहौल है। वीरवार को पड़ोस के सभी गांवों के सरपंचों को सूचित किया है कि अपने-अपने गांव वासियों को सतर्क रखें व चक्की दरिया की तरफ से आते जाते समय सावधानी का प्रयोग करें। उन्होंने प्रशासन से घड़ियालों को बाहर निकालने की गुहार लगाई। वहीं, वन्य जीव विभाग डिवीजनल फॉरेस्ट अफसर राजेश महाजन ने कहा कि यह प्रजाति किसी पर हमला नहीं करती। इससे डरने की जरूरत नहीं है। लोगों को इस बारे अवेयर किया जाएगा।
गुरदासपुर और हरगोबिंदपुर में रिलीज किए थे 50 घड़ियाल
डीएफओ राजेश महाजन ने बताया कि 60 साल पहले पठानकोट ढाकी सैंदा में घड़ियाल पाए जाते थे। उसके बाद ये विलुप्त हो गए। 2019 में गांव माड़ी बुच्चियां ब्यास दरिया में 49 घड़ियाल लाकर रिलीज किए गए। इसके बाद 2020 में गुरदासपुर और श्री हरगोबिंदपुर में 52 घड़ियाल चंबल से लाकर छोड़े गए। ताकि विलुप्त प्रजाति को फिर से अस्तित्व में लाया जा सके। यह जीव मनुष्य मित्र हैं। 50 से 100 ग्राम से बड़ी मछली पर भी हमला नहीं करते।
घड़ियाल पर हमला करने पर 7 साल कैद 50 हजार जुर्माना
डीएफओ राजेश महाजन का कहना है कि घड़ियाल विलुप्त हो चुकी प्रजातियों की शेड्यूल-1 प्रजाति का जीव है। यह हमलावर नहीं है। इसलिए इसे छेड़ने, हमला करने या मारने पर 7 साल कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। कुछ लोग डर के मारे इन जीवों पर हमला कर देते हैं। लेकिन इनसे मनुष्यों को कोई खतरा नहीं है। इसका मुंह छोटा होता है। लोग ऐसे दिखने वाले हर जीव को मगरमच्छ समझ लेते हैं।
श्री हरगोबिंदपुर से पठानकोट पहुंचना बड़ी बात: डीएफओ
डीएफओ राजेश महाजन ने बताया कि ये घड़ियाल श्री हरगोबिंदपुर के ब्यास दरिया में छोड़े गए थे। उनका पठानकोट तक आ जाना बड़ी बात है। डीएफओ ने बताया कि नर घड़ियाल का 15 किमी के एरिया पर कब्जा रहता है। उस एरिया में मादा घड़ियाल आ सकती हैं, लेकिन कोई अन्य नर उस एरिया में नहीं आता। यह आपस में क्षेत्र बांट लेते हैं। जहां इन्हें छोड़ा गया वहां से कुछ नरों ने आगे जाकर अपना कब्जा जमाया होगा तो कुछ पीछे की ओर आए होंगे। यही कारण है कि वह लगभग 100 किमी. दरियाई दूरी पार कर पठानकोट आ पहुंचे। उन्होंने कहा कि लोग घड़ियालों से डरे नहीं और उन्हें नुकसान न पहुंचाएं। ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई झेलनी पड़ सकती है। (संवाद)
फोटो:-3-ग्रामीणों द्वारा ढाकी सैंदा में देखे गए घड़ियाल की खींची फोटो।
फोटो:-3पी1-वन्य जीव विभाग द्वारा ब्यास दरिया में छोड़े गए घड़ियाल।