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हाईकमान के लिए सिरदर्द बना प्रधान का चुनाव

Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
Jalandhar
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जालंधर। पंजाब भाजपा में अध्यक्ष पद को लेकर खींचतान चरम पर है। दो बड़े गुट इस पद के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं और हाईकमान आम सहमति बनाने के लिए जुटा हुआ है। ऐसे में बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है। बीच का रास्ता प्रदेश में भाजपा के खाते की तीनों लोकसभा सीटों को ध्यान में रखते हुए निकाला जाएगा। इसको लेकर पार्टी में मंथन चल रहा है। पंजाब प्रधानगी का चयन अब गुजरात और हिमाचल के चुनावों के नतीजों के बाद ही होगा।
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पंजाब में पिछली बार प्रधानगी को लेकर दिल्ली दरबार तक मामला पहुंच गया था। उस समय मनोरंजन कालिया का गुट काफी हावी था और उन्होंने प्रदेश के तत्कालीन महासचिव अश्वनी शर्मा को कुर्सी पर बैठा दिया। दौड़ में दूसरे नंबर पर रहे कमल शर्मा प्रधानगी की कुर्सी के निकट पहुंचकर वापस आ गए।
अब समय बदला हुआ है, पठानकोट से विधायक व मौजूदा प्रधान अश्वनी शर्मा इसी कुर्सी पर बैठे रहना चाहते हैं लेकिन कमल शर्मा प्रधानगी के लिए फिर से दौड़ में है। अश्वनी शर्मा व कमल शर्मा में कौन प्रधान बनेगा, इसको लेकर संघ व भाजपा में चर्चा पूरी तरह से गर्म है। सूत्रों के मुताबिक आरएसएस का लगाव कमल शर्मा के प्रति है, जो इस समय मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार हैं। कमल शर्मा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से आए हैं और मध्य प्रदेश में भी मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं। अब वे प्रदेश अध्यक्ष बनने के इच्छुक हैं लेकिन अश्वनी शर्मा आड़े आ रहे हैं। हाईकमान इसमें आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन अभी तक सहमति नहीं बनी है। इस कारण अब हाईकमान बीच का रास्ता निकलाने की कोशिश में है।
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बीच का रास्ता होशियारपुर, गुरदासपुर की लोकसभा सीट पर फोकस कर निकाला जा रहा है। पिछली बार भाजपा ने अमृतसर की लोकसभा सीट जीत ली थी जबकि होशियारपुर व गुरदासपुर में पार्टी हार गई थी। बीच के रास्ते में भाजपा हाईकमान इन क्षेत्रों से ही किसी नेता को आगे लगा सकती है ताकि उसका फायदा लोकसभा चुनावों में मिल जाए। होशियारपुर के राज्यसभा सदस्य अविनाश राय खन्ना पंजाब के प्रधान रह चुके हैं वहीं उसी क्षेत्र के तीक्ष्ण सूद के नाम पर भी विचार किया जा रहा है। बेशक होशियारपुर सीट आरक्षित है लेकिन हाईकमान इस इलाके से नेता को आगे लाकर इस सीट पर कब्जा करने पर भी विचार कर रही है। गुरदासपुर में भाजपा के पास कोई बड़ा दिग्गज नहीं है। वहां से दो बार विनोद खन्ना चुनाव जीत चुके हैं, वह पिछली बार हार गए थे। वह स्टार हैं, इसलिए प्रधानगी की दौड़ में उनका नाम नहीं आ रहा है।
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