जालंधर। पंडित रविशंकर बेशक इस दुनिया को अलविदा कह गए हों, लेकिन उनके सितार की मधुर धुनें आज भी उन लोगों के कानों में गूंजती हैं, जो उनकी कला के कांयल थे। पंडित रविशंकर जालंधर में हर साल लगने वाले संगीत महाकुंभ में कई बार श्रोताओं को मुग्ध कर चुके हैं।
हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन में संगीत की दुनिया की नामी हस्तियां शामिल होती हैं। सम्मेलन सभा की महासचिव पूर्णिमा बेरी कहती हैं कि पंजाब में आतंकवाद के दौर से पहले पंडित रवि शंकर को कई बार जालंधर में देवी तालाब में होने वाले सम्मेलन में बुलाया गया था। आज भी याद है उनकी सितार से निकली धुन कानों में गूंजती है। उनकी अंगुलियां जब सितार पर चलती थीं, तो फिजा भी खामोश हो जाती थी। पंडित रविशंकर और विलायत खां एक ही घराने से थे, लेकिन पंडित उनसे काफी बेहतर थे।
आतंकवाद का दौर शुरू होने के साथ ही पंडित रविशंकर का नाता पंजाब से टूट गया था। आतंकवाद के दौर में हरिवल्लभ संगीत सभा होती थी, लेकिन एक-दो कलाकार ही अपनी प्रतिभा दिखाते थे, इसलिए कई कलाकारों का नाता संगीत सम्मेलन से टूट गया। पूर्णिमा बेरी ने कहा कि पंडित रविशंकर के इस दुनिया से जाने से उनकी कमी कभी भी पूरी नहीं होगी।