करतारपुर कॉरिडोर खुलना खालसा पंथ की जीत : बादल
पूर्व मुख्यमंत्री बोले, यह संगत की अरदासों का फल, सियासी दल करें क्रेडिट वार से परहेज
महेश कुुुमार
सुलतानपुर लोधी (कपूरथला)। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि करतारपुर कॉरिडोर खुलना खालसा पंथ की जीत है। यह संगत की अरदासों की बदौलत मुमकिन हो सका है। इसलिए सियासी दलों को इस पर क्रेडिट वार से परहेज करना चाहिए। वह सुल्तानपुर लोधी में श्री गुरु नानक देव के 549वें प्रकाश पर्व के शुभ अवसर पर गुरुद्वारा श्री बेर साहिब में नतमस्तक होने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे।
बादल ने कहा कि सही मायनों में करतारपुर साहिब कॉरिडोर के खुलने का श्रेय नानक नाम लेवा संगत को मिलना चाहिए, जो पिछले 70 सालों से उन सभी गुरुधामों के खुले दर्शन दीदार और सेवा संभाल के लिए अरदास करती आ रही है, जिनसे सिख संगत को बिछोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि हमारे बुजुर्गों ने हमेशा संगत की अरदास की ताकत के बारे में बताया है। वीरवार को इस ताकत को हमने अपनी आंखों से देख लिया।
उन्होंने कहा कि हम में से कोई भी इसका श्रेय लेने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन सच्चा श्रेय अकाल पुरख और गुरु साहिबानों को जाता है, जिन्होंने सिख संगत की अरदासों का जवाब दिया है। इस संबंधी आखिरी सरकारी और रस्मी फैसले समय की सरकार को लेने हैं। उन्होंने कहा कि वह सरकारी फैसले के लिए एनडीए सरकार खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तहेदिल से शुक्रिया अदा करते हैं, जिन्होंने भारतीय सीमा की तरफ आधुनिक कॉरिडोर बनाने का एलान किया है। प्रधानमंत्री भी इसके लिए सबसे पहला श्रेय गुरु साहिबानों को ही देंगे।
पूर्व सीएम ने सभी राजनीतिक पार्टियों को हर सिख की इस सांझी अभिलाषा के लिए श्रेय लेने की लालसा से बचने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि श्रेय लेने की दौड़ में उलझे बगैर इस उपलब्धि का मिलजुल कर जश्न मनाया जाना चाहिए। जब एक पत्रकार ने पूछा कि इसका श्रेय किसे मिलना चाहिए तो उन्होंने कहा कि चाहे वह जानते हैं कि यह शिरोमणि अकाली दल और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की चिरकालीन मांगों में से एक था, लेकिन इस पावन अवसर ने राजनीति को पीछे धकेल दिया है। यह खालसा पंथ की जीत है, जो राजनीतिक गुटबाजी से ऊपर की बात है।