प्रतिबंधित डोन का इस्तेमाल जोरों पर
समारोहों में वीडियोग्राफी के लिए सरेआम हो रहा प्रयोग
कपूरथला।
सूबे में ड्रोन का इस्तेमाल सुरक्षा के लिए खतरे का सबब बन सकता है। ड्रोन का इस्तेमाल प्रतिबंधित है, फिर सूबे में वीडियोग्राफी के लिए धड़ाधड़ का प्रयोग हो रहा है। जिसके बारे में न तो जिला प्रशासन को जानकारी है और न ही पुलिस तक को कोई भनक है। नियमानुसार ड्रोन का इस्तेमाली पूरी तरह से गैर-कानूनी है, फिर भी विवाह समारोह में ड्रोन से वीडियोग्राफी का ट्रेंड इन दिनों खूब चलन में है। गैर-कानूनी ढंग से विवाह-समारोहों में मोटा मुनाफा कमाने के लिए प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स सरेआम धड़ल्ले से ड्रोन का इस्तेमाल करते आम देखे जा रहे हैं। इस बात से बिल्कुल बेखबर की यह ड्रोन प्रतिबंधित है और किसी भी समय उन्हें मुसीबत में डाल सकते हैं। ड्रोन को ‘यूएवी’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है ‘अनमैन्ड एरियल व्हीकल’।
भारत में ड्रोन का प्रयोग और बिक्री अवैध है, क्योंकि एयरक्राफ्ट रूल्ज 1937 और रूल्ज 30 मुताबिक किसी संस्था या साधारण व्यक्ति को इसके इस्तेमाल से पहले रूल्ज मुताबिक रजिस्टर्ड कराना बेहद जरूरी होता है।
नवंबर 2017 में ज्वाइंट डायरेक्टर सिविल एविएशन ओर से यह कहा गया था कि भारत सरकार जल्द ही ड्रोन के प्रयोग से संबंधित नए गाइडलाइंस बना रही है। जिसके माध्यम से ड्रोन को उसके वजन के हिसाब से पांच श्रेणियों में बांटा गया। जिसके मुताबिक 250 ग्राम से कम वजन वाले को ‘नैनो ड्रोन’, 250 ग्राम से 2 किलोग्राम वाले को ‘माइक्रो ड्रोन’, 2 से 25 किलो तक को ‘मिनी ड्रोन’, 25 किलो से 150 किलो तक को ‘स्माल ड्रोन’ और 150 से अधिक वजन वाले को ‘बिग ड्रोन’ की श्रेणी में शामिल किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया था कि नैनो ड्रोन के अलावा किसी भी तरह के ड्रोन को उड़ाने से पहले डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन से अनुमति लेना बेहद जरूरी होगा, लेकिन इस समय जो शादी-समारोह में जो ड्रोन उड़ रहे हैं, वह नैनो ड्रोन से बड़े हैं, जिसकी अनुमति किसी के पास नहीं है। डीजीसीए ने ड्रोन एरिया भी बनाए गए है, जिसमें एयरपोर्ट से पांच किलोमीटर के घेरे, पब्लिक की सेफ्टी को देखते हुए घनी आबादी वाले एरिया, इंटरनेशनल बार्डर से 50 किलोमीटर के अंदर और आपातकालीन वाले स्थान पर ड्रोन उड़ाने की पजूर्ण तौर पर मनाही है। हवा में उड़ते समय ड्रोन के खराब होने के चलते हादसा होने की सूरत में आईपीसी की धारा 287 अधीन ड्रोन के मालिक को छह माह की सजा या 1000 रुपये जुर्माने का भी प्रावधान है। साल 2014 में वाराणसी में ड्रोन की मदद से गंगा की आरती के समय की वीडियो बनाते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। एक अनुमान के अनुसार कपूरथला में करीब 35-40 फोटोग्राफर्स के पास अपने निजी ड्रोन हैं। जालंधर रेंज के आईजी अर्पित शुक्ला का कहना है कि अभी तक तो सरकार के निर्देशानुसार ड्रोन का इस्तेमाल गैर-कानूनी हैं। आगामी दिनों में अगर नए रूल्ज या गाइडलाइंस आती है तो उसके मुताबिक बनती कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।