हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन में बही सुरों की गंगा
अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। श्री देवी तालाब मंदिर में चल रहे 142वें हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन में रविवार को कलाकारों ने खूब रंग जमाया। हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन की प्रधान पूर्णिमा बेरी व महासचिव दीपक बाली की देख रेख में करवाए इस कार्यक्र्म में संगीत की मधुर गगां बही।
रविवार की प्रस्तुति में साल 2016 में हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन में प्रथम रहे कल्याण ने अपनी प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। सोनिया मेहर व विष्णुपुर घराने से संबंध रखने वाले कल्याण मजूमदार ने सितार की धुनों पर सुरों की ऐसी गंगा बहाई की, उसको सुनकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। कल्याण मजूमदार के पिता सुभाजीत मजूमदार भी विख्यात सितार प्लेयर थे। आज की प्रस्तु्ित के बाद श्रोताओं ने कल्याण मजूमदार की कला की भरपूर प्रसंशा की।
इस सुरो के संगम में महाराष्ट्र के रहने वाले कृष्णा ने भी संगीत की धुन पर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। अखिल भारतीय प्रतिभा पुरस्कार से सम्मानित कृष्णा हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन जैसे बड़े मंच पर आकर काफी बढिया महसूस कर रहे थे। इस महा सम्मेलन में भाग लेने के लिए कनाडा से पहुंचे रोहन सिंह भोगल जो कि मशहूर तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन के शिष्य हैं, ने तबले की तान पर सभी को झूमने के लिए मजबूर कर दिया। मशहूर गजल गायक जगजीत सिंह व उस्ताद आशीष खान के साथ अपनी प्रस्तुति दे चुके रोहन सिंह भोगल ने अपनी आज की प्रस्तुति से साबित कर दिया कि वह वकई तबले पर थिरकने वाली ऊंगलियों के जादूगर हैं।
इस सम्मेलन में हर एक कलाकार अपनी प्रतिभा का बखूबी से प्रदर्शन कर रहा है। इन कलाकारों के बाद जालंधर की रहने वाली पंडित रमाकांत की शिष्या व युवा उत्सव में विजेता रह चुकी अवतार कौर, वीना वाधक व ग्वालियर घराने के कलाकार दीपक कशीरसागर ने वीना वाधक, आकाशवाणी संगीत सम्मेलन व तासेन संगीत सम्मेलन से मशहूर हुए महेंद्र तोके, इटावा घराने के मशहूर सितार वादक उस्ताद शाहिद परवेज खान व संगीत की पूजा करने वाले डा. वेंकटेश कुमार की प्रस्तति खबर लिखे जाने तक बाकी थी। डा. वेंकटेश कुमार इस कार्यक्रम का समापन बसंत गाकर करेंगे।