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श्वेत मलिक को मैदान में उतार भाजपा हाईकमान ने गुटबाजी को दिया विराम, कमल-सांपला गुट से भाजपा वर्कर से परेशान

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श्वेत मलिक को मैदान में उतार गुटबाजी को दिया विराम
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पंजाब में आरएसएस एक बार फिर से हावी
कमल शर्मा और विजय सांपला के बीच चल रही थी गुटबाजी
सुरिंदर पाल
जालंधर।
अमृतसर के पूर्व महापौर व राज्यसभा सदस्य श्वेत मलिक को भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष बनाकर राष्ट्रीय प्रधान अमित शाह ने कमल शर्मा और विजय सांपला के बीच की गुटबाजी को विराम दे दिया है। वहीं आरएसएस के चहेते मलिक को मैदान में उतारकर यह संकेत दे दिया है कि भाजपा में संघ से बड़ा कोई नहीं है।
सूबे में बीते दस सालों में भाजपा गुटबाजी का शिकार होती आ रही है। 2007 में पार्टी ने एकजुटता से सत्ता हासिल की थी। उस समय मनोरंजन कालिया का सिक्का चलता था, लेकिन सत्ता में आते ही उनके विरोधी भी बनने लगे। कालिया की मर्जी से भाजपा प्रधान अश्वनी शर्मा को बनाया गया। इसके साथ ही दरकिनार किये गए तत्कालीन महासचिव कमल शर्मा ने अपना दल मजबूती से खड़ा करना शुरू कर दिया। 2011 में सूबे के तत्कालीन प्रभारी शांता कुमार ने मनोरंजन कालिया का इस्तीफा लेकर कमल शर्मा को जिम्मेदारी देकर उनकी लाबी के तमाम लोगों को पावरफुल कर दिया। कमल शर्मा के करीबी तीक्ष्ण सूद को कालिया की जगह पर निकाय मंत्री बनाया गया। 2012 में भाजपा बेशक दोबारा सत्ता में आ गई, लेकिन कमल शर्मा का दल काफी मजबूत रहा। शर्मा न केवल भाजपा के प्रधान बने, बल्कि अपने निकटवर्ती अनिल जोशी को निकायमंत्री, तीक्ष्ण सूद को सीएम का मुख्य सलाहकार, भगत चुन्नी लाल को विपक्ष का नेता बनावाया। मनोरंजन कालिया का दल पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया। उनको सीनियर होने के बावजूद मंत्री पद नहीं दिया गया।
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कालिया तब दोबारा सक्रिय हुए, जब 2014 में विजय सांपला ने होशियारपुर से सांसद के चुनाव जीते और केंद्र सरकार में राज्यमंत्री बने। सांपला और कालिया के बीच के तालमेल से भाजपा की सियासत ने दोबारा करवट ली। सांपला को पंजाब की प्रधानगी मिलने के बाद कमल शर्मा के करीबी नेता हाशिये पर चले गए। बड़े-बड़े समारोह में कमल शर्मा के गुट के नेताओं को तरजीह देना बंद कर दिया गया। सांपला व कालिया की टीम ने पंजाब का पूरा चार्ज ले लिया। अब भी कालिया को प्रधानगी दिलाने के लिए उनका पूरा धड़ा जोर लगा रहा था, लेकिन शर्मा गुट ने भी अपनी टांग पूरी फंसा रखी थी। कमल शर्मा का गुट चाहता था कि जालंधर के पूर्व महापौर राकेश राठौर को पंजाब प्रधान बनाया जाए। दोनों गुटों के बीच भाजपा लगातार विधानसभा चुनाव से लेकर गुरदासपुर उपचुनाव और निकाय चुनाव हारती चली गई। आरएसएस का एजेंडा भी भाजपा पंजाब में पूरी तरह से लागू नहीं कर पा रही थी। आरएसएस के कई बड़े नेताओं की भाजपा में सुननी बंद हो गई थी।
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जालंधर में बजाओ ढोल खोलो पोल रैली में केंद्रीय राज्यमंत्री व पंजाब प्रधान विजय सांपला को स्टेज से सुखबीर बादल को कहना पड़ा कि अकाली दल वाले कहते हैं कि भाजपा के पल्ले कुछ नहीं है, लेकिन देखो भाजपा वर्करों की भीड़, अब यह कहना तो बंद कर दो। ऐसे में भाजपा हाईकमान काफी सकते में आ गया था। ऐसे में पंजाब प्रधान बदलने की चर्चा जोर पकड़ने लगी तो सांपला-कालिया व कमल शर्मा गुट ने दिल्ली में पूरी ताकत झोंक दी। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली के करीबी श्वेत मलिक जहां गुटबंदी से दूर हैं, वहीं वह आरएसएस पृष्ठभूमि से हैं, ऐसे में भाजपा के प्रधान अमित शाह ने जहां धड़ेबाजी को खत्म करने की कोशिश की। वहीं आरएसएस नेताओं को दोबारा संकेत दे दिया कि उनके बिना भाजपा नहीं चलेगी।
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