अब सरकारी स्कूलों में भी सीबीएसीई जैसा पाठ्यक्रम
दो महिला अध्यापकों ने एससीईआरटी-एनसीईआरटी के समावेश से तैयार कीं किताबें
अगले सेशन में पढ़ेंगे सूबे के सरकारी स्कूलों के पहली-दूसरी कक्षाओं के बच्चे
महेश कुमार
कपूरथला।
दो महिला अध्यापकों ने एससीईआरटी और एनसीईआरटी के समावेश से ऐसी किताबें तैयार की हैं, जिनसे सरकारी स्कूलों के बच्चे भी सीबीएसई के बराबर शिक्षा हासिल कर सकेंगे। 2019 के नए सेशन में सूबे के सरकारी स्कूलों की पहली और दूसरी कक्षाओं में यह किताबें बच्चे पढ़ेंगे।
कपूरथला के सरकारी हाई स्कूल मंसूरवाल दोनां की इंग्लिश टीचर सुनीता सिंह और सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल अटारी, फिरोजपुर की सोशल स्टडी टीचर रोजी मेहता ने की मानें तो सीबीएसई से अनुबंधित स्कूलों में जो बच्चा यूकेजी में शिक्षा ग्रहण कर रहा होगा, वही शिक्षा पहली कक्षा में सरकारी स्कूलों के नौनिहालों को मिलेगी। यहीं नहीं कपूरथला की सुनीता सिंह की स्पीकिंग एंड लिसनिंग एक्टीविटी पीएसईबी की इंग्लिश विभागाध्यक्ष सुरभि के पास पहुंच चुकी है, जो छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा में लागू होने की उम्मीद है।
वहीं सुनीता और रोजी के कुछ चैप्टर 11वीं और 12वीं कक्षा में भी लागू हो रहे हैं। इससे सरकारी स्कूलों के बच्चे निजी स्कूूलों के बच्चों की तरह स्मार्ट और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलेंगे। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर सुनीता सिंह ने बताया कि वह मुराल पेंटिंग के जरिये स्कूल की दीवारों को इंग्लिश कविता और पिक्चर्स से रंग कर शिक्षा का माहौल पैदा कर रही हैं, वहीं सूबे में यह पहला सरकारी स्कूल होगा, जहां राष्ट्रीय भाषा हिंदी, राज्य भाषा पंजाबी और अंतरराष्ट्रीय भाषा इंग्लिश में प्रार्थना होती है।
उन्होंने बताया कि 11 माह से स्कूल में वह स्वच्छ भारत अभियान, पर्यावरण और श्रमदान के लिए कार्य कर रही हैं, वहीं बच्चों को शिष्टाचार से पेश आने का पाठ भी पढ़ाती हैं। 2008 से इस काम में जुटीं सुनीता सिंह का कारवां लगातार जारी है। वह यूके बेस्ड जॉली फॉनिक्स के 44 साउंड से बच्चों में इंग्लिश में पारंगत बना रही हैं। इससे पहले सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल भवानीपुर में भी उन्होंने ऐसी ही पेंटिंग की हैं। अब तक वह करीब 60-70 हजार रुपये अपनी जेब से खर्च चुकी हैं और प्रतिदिन स्कूल लगने से एक घंटा पहले आती हैं। छुट्टी वाले दिन पूरे समर्पण भाव से बच्चों के विकास के लिए लगी रहती हैं। वह स्कूल में हरियाली को सहेजने के लिए माली और सफाई के लिए अलग से 2000 रुपये प्रतिमाह अपनी ओर से खर्च कर रही हैं।
स्कूल में लैंग्वेज लैब स्थापित करना चाहती हैं सुनीता
सुनीता सिंह ने बताया कि उन्होंने यूके के नेशनल करीकुलम में शामिल जॉली फॉनिक्स साउंड को पंजाबी और हिंदी मुहारनी से जोड़कर इंग्लिश की मुहारनी तैयार की है। यह यूके की कॉपी नहीं है, बल्कि उन्होंने खुद रीक्रेट की है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर यूके के लोग हिंदी सीखना चाहें तो उन्हें क, ख, ग से ही शुरुआत करनी होगी। ऐसा ही उन्होंने इंग्लिश के साथ किया है। बड़े निजी स्कूलों में जॉली फॉनिक्स पढ़ाई जाती है, जिसकी कीमत 1.20 लाख रुपये प्रति किट है। उन्होंने बताया कि अब उनकी योजना स्कूल में लैंग्वेज लैब स्थापित करने की है। इसके लिए वह तैयारी कर रही है। सुनीता सिंह का कहना है कि उनका बच्चों के राइट ब्रेन डेवलेपमेंट पर फोकस है।
सुनीता सिंह की उपलब्धियां
-हैदराबाद में अंतरराष्ट्रीय शिक्षक एजुकेशन कांफ्रेंस में पांच पुरस्कार जीते।
-रिसर्च वर्क के तहत इंग्लिश की मुहारनी रीक्रेट की।
-इंटरनेट के माध्यम से 1000 से अधिक बच्चों को उनकी सुविधा अनुसार अंग्रेजी सिखा रही हैं।
-यू-ट्यूब पर एजुकेशन वीडियो बनाकर अपलोड करती हैं।
-2016 में ब्रिटिश काउंसिल में बतौर इंग्लिश मास्टर ट्रेनर काम किया।
-2016-17 में एससीईआरटी के साथ बतौर की-रिसोर्स पर्सन सेवाएं प्रदान कीं।
-26 जनवरी 2018 को बेहतरीन शिक्षा सेवाओं के लिए डीसी कपूरथला मोहम्मद तैय्यब ने सम्मानित किय्रा।