फरीदकोट। सीआईए स्टाफ की हिरासत में 18 मई 2019 की रात को नौजवान जसपाल सिंह की संदिग्ध मौत के बाद अगले दिन 19 मई की सुबह उसके शव को खुर्द बुर्द करने के मामले में पुलिस ने सीआईए स्टाफ के दो मुलाजिमों सुखमंदर सिंह व दर्शन सिंह को गिरफ्तार किया हुआ है और इन दिनों वह न्यायिक हिरासत के चलते जेल में बंद है। शनिवार को पुलिस ने इन दोनों मुलाजिमों को एक बार फिर प्रोडक्शन वारंट के आधार पर जेएमआईसी एकता उप्पल की अदालत में पेश किया और जसपाल सिंह की लाश समेत उसके कपड़े, फंदा लगाने में उपयोग चादर के अलावा उसका मोबाइल फोन बरामद करने के लिए पुलिस रिमांड की मांग रखी। दोनों पक्षों की बहस के बाद अदालत ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि दोनों आरोपी पहले ही चार दिन पुलिस रिमांड पर रह चुके है और ऐसे में उनके रिमांड को और नहीं बढ़ाया जा सकता।
सीआईए के दोनों मुलाजिमों पर आरोप है कि इन्होंने नौजवान के कथित रूप से खुदकुशी करने के बाद इंचार्ज इंस्पेक्टर नरिन्द्र सिंह के साथ मिलकर उसके शव को ठिकाने लगाने की मंशा से नहर में फेंक दिया था। पुलिस के अनुसार नहर में फेंकने से पहले आरोपियों ने नौजवान की लाश से सारे कपड़े उतार लिए थे। बचाव पक्ष के वकील मनदीप चानना ने पुलिस के आग्रह का विरोध करते हुए कहा कि दोनों मुलाजिम पहले चार दिन रिमांड पर रहे है और पुलिस कुछ बरामद नहीं कर सकी।
हनुमानगढ़ से बरामद लाश का डीएनए टेस्ट करवाएगी
जिला पुलिस ने दो दिन पहले हनुमानगढ़ से बरामद लाश का डीएनए टेस्ट करवाने का फैसला किया है। हालांकि परिवार ने शव जसपाल सिंह का होने से साफ इंकार कर दिया है। पुलिस उस शव को जसपाल सिंह का ही मान कर चल रही है। डीएनए टेस्ट के लिए पुलिस को जसपाल सिंह के परिवार के सैंपल भी लेने होंगे, जिसके लिए परिवार अभी तैयार नहीं है। एक्शन कमेटी के सदस्य केशव आजाद का आरोप है कि असल में पुलिस केस से पीछा छुड़ाने के चक्कर में किसी और का शव जबरन परिवार को सौपना चाहती है। इस मामले में एसएसपी राज बचन सिंह संधू ने कहा कि न सिर्फ हनुमानगढ़ से बरामद शव का शक के आधार पर डीएनए टेस्ट करवाने हैं, बल्कि पुलिस अभी भी जसपाल की लाश की तलाश में नहर को खंगाल रही है।