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एसबीआई एजीएम गरिमा परिहार का सीजेएम कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण

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एसबीआई एजीएम गरिमा परिहार का कोर्ट में आत्मसमर्पण
हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद हुई पेश
करोड़ों की बैंक धोखाधड़ी का मामला, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद हुई पेश
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला। मल्टी करोड़ के बैंक धोखाधड़ी के मामले में भारतीय स्टेट बैंक के चार अधिकारियों में से एक एजीएम गरिमा परिहार ने शुक्रवार को न्यू जूडिशियल कांप्लेक्स में सीजेएम अजीतपाल सिंह के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। दो बार पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के बाद आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई, वहां से भी जमानत याचिका खारिज होने के बाद कोई अन्य विकल्प न बचने पर एजीएम कोर्ट के सामने पेश होने का निर्णय लिया। अदालत ने आरोपी एजीएम को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। अब उसे 10 अक्टूबर को अदालत के सामने पेश किया जाएगा।
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कुछ समय पहले एजीएम गरिमा परिहार, एजीएम अदिति वालिया, एजीएम विपिन नेगी और प्रबंधक धर्मेंद्र तिवारी सहित एसबीआई बैंक के अधिकारियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जो करोड़ों की बैंक धोखाधड़ी के मामले में नामित हैं। इससे पहले पंजाब और हरियाणा के इस उच्च न्यायालय ने इन आरोपियों के दो बार जमानत आवेदन को खारिज कर दिया था। अब सुप्रीमकोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी। इससे पहले सीजेएम कपूरथला ने इन आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने के बाद इस धोखाधड़ी के मामले में गंभीर नोट लेना शुरू किया था। 28 अगस्त को सुनवाई की आखिरी तारीख पर अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया चंडीगढ़ के तीन एजीएम विपिन नेगी, अदिति वालिया, गरिमा परिहार और एसबीआई शाखा प्रबंधक धर्मेंद्र तिवारी, एक चार्टर्ड एकाउंटेंट राजीव सिंह के अलावा विदेश में फरार हो चुके मुख्य आरोपी सुखविंदर सिंह की पत्नी अमरदीप कौर, करनैल सिंह और परमजीत सिंह को पीओ करार दिया था। एकम इंपेक्स की शिकायतकर्ता सोनिया बावा ने कहा कि मुख्य आरोपी सुखविंदर सिंह को पीओ घोषित किया गया था, जो विदेश भाग गया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने जांच में पाया कि सभी बैंकों के दस्तावेजों पर साझेदारी के खिलाफ एक ही साझेदार के हस्ताक्षर हुए थे और मुख्य आरोपी सुखविंदर सिंह ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर जाली दस्तावेजों के अलावा फर्म और बैंक खातों से छेड़छाड़ की।
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