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गोद लिए गांव ढंढी कदीम में खर्च किए सांसद ने 1

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गोद लेने के बाद गांव में सांसद ने सिर्फ दो बार रखे कदम
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महिला सरंपच ने कहा-70 में से सिर्फ तीन कार्य ही कराए, पति 12 बार गए सांसद के पास, नहीं हो रही सुनवाई
गांव में अस्पताल, बैंक, पार्क, स्टेडियम व स्ट्रीट लाइटें नहीं, सड़कों का बुरा हाल, टूटी सड़कें
गंदे पानी की निकासी की कोई सुविधा नहीं, घरों में घुस रहा नालियों का पानी
पंचायत भवन व दो आंगनबाड़ी की इमारतों पर सांसद ने खर्च किए 18.50 लाख रुपये
अनिल कुमार
गांव ढंढी कदीम (जलालाबाद)। सांसद द्वारा गोद लिए गांव ढंढी कदीम में लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। गांव को गोद लेने के बाद सांसद शेर सिंह घुबाया गांव ढंढी कदीम में सिर्फ दो बार (अक्तूबर 2014 व मार्च 2016 ) आए। गांव के सरपंच का कहना है कि गांव को गोद लेने के बाद 70 विकास कार्य होने थे। जबकि अब तक सिर्फ तीन ही कार्य हुए हैं। गांव में बस सेवा नहीं है। सरकारी प्राइमरी स्कूल गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर है। गांव में सरकारी अस्पताल, बैंक, स्ट्रीट लाइटें, सड़कें, स्टेडियम, पार्क, छप्पड़ व बस स्टैंड तक नहीं हैं।

कोई विकास कार्य नहीं हुआ : दलीप सिंह
गांव ढंढी कदीम के ग्रामीण दलीप सिंह व वजीर सिंह ने बताया कि गोद लेने के बाद गांव में कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। गांव में बस स्टैंड नहीं है। सांसद ने कहा था कि गांव से शहर तक बस सेवा शुरू की जाएगी, जो शुरू नहीं हुई। गांव में अस्पताल की सुविधा नहीं है, रात में कोई बीमार हो जाता है तो शहर जाना पड़ता है। गांव की फिरनी में लाइटें नहीं लगी है, रात को गांव में अंधेरा छाया रहता है। यहां पार्क और स्टेडियम नहीं है, जबकि इसके लिए जगह पंचायत ने दी है।
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ये काम होने थे जो ठप हैं
बलवीर सिंह ने बताया कि गांव सुंदर ग्राम के अधीन आता है। पूरे गांव में पौधे लगने को आए थे, जो नहीं लगाए गए। गांव की फिरनी में सीसीटीवी कैमरे लगने थे, वो भी नहीं लगे। गांव ढंढी कदीम वाया काहने वाला से जलालाबाद के बीच सड़क बननी थी, जिस पर पत्थर डाल हैं, लेकिन अभी तैयार नहीं है। गांव में गरीब लोगों को पानी की सुविधा के लिए 27 ट्यूबवेल मंजूर हुए थे, जिनमें से गांव में सिर्फ एक ही ट्यूबवेल लगा है। गांव में 250 शौचालय मंजूर हुए थे, इनमें से 140 ही बन सके हैं। गांव में नालियों का निर्माण सही न होने से बरसात में लोगों के घरों में पानी भर जाता है। निकासी की व्यवस्था नहीं हुई है। कई घरों में शौचालय बन गए हैं, लेकिन नालियों के कारण उनके शौचालय में गंदगी रहती है, जिस कारण लोग खेतों में शौच के लिए जाते हैं। गांव में गरीब लोगों को पांच-पांच मरले के प्लाट नहीं दिए गए। लक्ष्मण सिंह ने बताया कि गोबर डालने के लिए गड्ढे खोदने के लिए सरकार की तरफ से उन्हें 18 हजार रुपये मिलने थे, गढ्डे तो खोद लिए लेकिन अभी तक राशि नहीं मिली।

शिक्षकों की सुरक्षा के प्रबंध नहीं
स्कूल कमेटी के मेंबर दलीप सिंह ने बताया कि गांव ढंढी कदीम में बने सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में लगभग 1400 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल में शिक्षकों की कमी है, कई शिक्षक डर के मारे स्कूल में आना नहीं चाहते हैं। क्योंकि किसी बच्चे को अगर शिक्षक डांट दें तो बच्चे उसे पीटने के लिए स्कूल के बाहर खड़े हो जाते हैं। सरकारी प्राइमरी स्कूल गांव ढंढी कदीम से लगभग एक किलोमीटर दूर है।

गांव की आबादी लगभग 4200
गांव ढंढी कदीम की आबादी लगभग 4200 है। इसे दो हिस्सों में बांटा है, इसमें से अब नत्था सिंह वाली ढाणी बना दी है। गांव ढंढी कदीम की आबादी 2200 और नत्था सिंह वाली ढाणी की आबादी लगभग 2000 है।

श्मशानघाट में बना रहे हैं संस्कार वाली भट्टी
सरपंच प्रीतो बाई के पति मक्खन सिंह ने बताया कि गांव ढंढी कदीम के श्मशान घाट में संस्कार करने वाली भट्टी का निर्माण कर रहे हैं। इसके बनने से अंतिम संस्कार में लगभग 80 किलो लकड़ी लगेगी। जबकि संस्कार करने में चार क्विंटल लकड़ी लगती है। इसके निर्माण में लगभग ढाई लाख रुपये का खर्च है, जबकि सांसद ने उन्हें डेढ़ लाख रुपये दिए हैं।

गोद लेने के बाद गांव में 70 कार्य होने थे, तीन ही हुए: सरपंच
सरपंच प्रीतो बाई ने कहा कि सांसद शेर सिंह घुबाया ने जब गांव ढंढी कदीम को गोद लिया, उसके बाद से गांव में 70 कार्य होने थे। लेकिन तीन ही काम हुए हैं। जिनमें 12 लाख से पंचायत भवन, पांच लाख से दो आंगनबाड़ी सेंटर के अलावा श्मशानघाट में बन रही संस्कार करने वाली भट्टी। जिसके लिए सांसद ने डेढ़ लाख रुपये की ग्रांट दी है, जबकि ढाई लाख रुपये लगने हैं। सरपंच प्रीतो बाई के पति मक्खन सिंह ने बताया कि गांव के विकास कार्यों के लिए वह पंचायत मेंबरों के साथ सांसद घुबाया के पास लगभग 12 बार जा चुके हैं, कोई सुनवाई नहीं हुई। सांसद गांव में पहली बार अक्तूबर 2014 और दूसरी बार मार्च 2016 को गांव में आए थे। उसके बाद से गांव में वह नहीं आए। गांव को गोद लेने के बाद कोई विकास कार्य गांव में नहीं हुए हैं।

बात करते-करते सांसद ने काटा फोन
सांसद शेर सिंह घुबाया से सवाल किया कि गांव ढंढी कदीम को गोद लेने के बाद कितनी धनराशि से विकास कार्य कराए हैं। इस पर सांसद का जवाब था कि गांव के सभी कार्य कराए हैं, जिनमें गांव बैंक, डाक घर, स्कूल व अन्य कार्य। जब सांसद से पूछा गया कि गांव में बैंक तो नहीं है और डाक घर भी दिन में सिर्फ एक घंटे खुलता है, इस पर सांसद ने कहा आपने गांव में जाकर देखा है, क्या बना है क्या नहीं बना है, जब सांसद से कहा कि मैं तो गांव में ही मौजूद हूं, उसके बाद सांसद ने मोबाइल फोन काट दिया और दोबारा फोन नहीं उठाया।
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फोटो संख्या-31एफजेडआरपी01,02,04,05, व 06
कैप्शन--गांव ढंढी कदीम (जलालाबाद) में ग्रामीण टूटी सडक़े व गलियां दिखाते समय समस्या बताते हुए।
फोटो संख्या-31एफजेडआरपी08 व 07
कैप्शन--गांव ढंढी कदीम (जलालाबाद) के श्मशानघाट में अंतिम संस्कार के लिए भट्टी का निर्माण करते हुए और सरपंच प्रीतो बाई का पति मक्खन सिंह जानकारी देते हुए।
फोटो संख्या-31एफजेडआरपी03
कैप्शन-गांव ढंढी कदीम (जलालाबाद) से गांव काहने वाला से होती जलालाबाद को जाने वाली सडक़ जो पिछले चार साल से नहीं बनी।
फोटो संख्या--31एफजेडआरपी09
कैप्शन--सांसद शेर सिंह घुबाया।
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