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चन्द्रशेखर आजाद के शहीदी दिवस पर श्रद्धाजंलि सभा आयोजित

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चंद्रशेखर आजाद को याद किया
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पंजाबी सभ्याचार मंच ने शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि दी
अमर उजाला ब्यूरो
अबोहर। महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के शहीदी दिवस पर पंजाबी सभ्याचार मंच ने श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। बतौर मुख्य अतिथि लेखक परिषद के प्रधान राज सदोष ने शिरकत की। अध्यक्षता दर्शनलाल चुघ ने की।
सदोष ने कहा कि 23 जुलाई 1906 को गांव भाबरा (मध्य प्रदेश) में जन्में चंद्रशेखर आजाद की माता ने उन्हें संस्कृत का विद्वान बनाने के लिए काशी विद्यापीठ बनारस भेजने का निर्णय लिया। मात्र 15 वर्ष की आयु में वह महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के साथ जुड़कर देश को आजाद करवाने के रास्ते पर निकल पड़े। 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद में ब्रिटिश साम्राज्य की पुलिस के हाथों मरने की बजाए चंद्रशेखर आजाद ने मुकाबले में बची अंतिम गोली से अपने प्राण न्यौछावर करना बेहतर समझा।
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अंकुर गर्ग ने भारतीय वायु सेना की ओर से पाकिस्तानी आतंकवादियों के विरुद्ध की गई बड़ी कार्यवाही की सराहना करते हुए कहा कि यदि हमारी सरकार अपने मित्र देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखना जानती है, तो शत्रु देशों की कायराना हरकत का मुंह तोड़ जवाब देना भी भलीभांति आता है। मंच के प्रधान गुरचरण सिंह गिल ने बच्चों को देशभक्ति प्रेरणा दी, ताकि वह अच्छे नागरिक बनकर देश की आजादी को बरकरार रखने में सहयोगी बने, जिसे प्राप्त करने के लिए आजाद जैसे हजारों शूरवीरों ने कुर्बानियां दी। इस मौके पर सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों ने शहीद के चित्र पर पुष्पांजलि भेंट की।
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