छह माह में अफसरशाही पर पकड़ नहीं बना पाए मेयर
-विधायकों की पार्षद पत्नियों तक के नहीं हो रहे काम
-मेयर राजा पांच बार बन चुके हैं पार्षद, अफसरशाही की जिम्मेदारी फिक्स की जाएगी
सुरिंदर पाल
जालंधर। नगर निगम में पांच बार पार्षद बने मेयर जगदीश राज राजा के लिए कुर्सी कांटों का ताज बनती जा रही है। उनकी पकड़ अफसरशाही पर नहीं बन पा रही है, जिस कारण शहर में कई महत्वपूर्ण मामले अटके पड़े हैं। हालात यह बनते जा रहे हैं कि विधायकों की पार्षद पत्नियों के काम भी निगम की अफसरशाही नहीं कर रही है। यह मामले हाउस की मीटिंग में लगातार उठ रहे हैं।
मेयर जगदीश राज राजा शिअद भाजपा के कार्यकाल में विपक्ष के नेता भी रहे हैं और हाउस में हमेशा उनका तीखा प्रहार मेयर व अधिकारियों पर रहा है। लेकिन अब राजा जालंधर के मेयर हैं। उनको 25 जनवरी को पार्षदों ने मेयर चुना और यह आशा कि किरण दिखने लगी थी कि नगर निगम के कामकाज में तेजी आ जाएगी और सब कुछ पारदर्शिता से होगा। सात माह का समय बीत चुका है लेकिन मेयर जगदीश राज राजा अभी अफसरशाही पर अपना प्रभाव नहीं बना सके हैं। 25 जून को हाउस की बैठक में मेयर राजा ने अफसरशाही पर अपना दबदबा बनाने के लिए जो रणनीति अपनाई थी, वह सिरे नहीं चढ़ी, उलटा अफसरशाही से उनसे ठन गई।
अफसरशाही का तर्क था कि जनरल हाउस की बैठक में पार्षदों के सवालों के अफसरों को मौके पर ही फटकार लगाई गई। अधिकारियों ने अपनी नाराजगी जताते हुए अपनी बात चंडीगढ़ तक पहुंचायी और कहा कि नगर निगम एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि अफसरों को हाउस की बैठक में मौजूद रहने के लिए बाध्य किया जाए।
मेयर राजा ने एक माह बीतने के दोबारा हाउस की बैठक सोमवार को बुलाई तो अधिकारियों को पुराने प्रस्तावों के बारे में पूछा लेकिन हालात जस के तस थे। एक भी अधिकारी ने तसल्लीबख्श उत्तर नहीं दिया। विधायक राजिंदर बेरी की पत्नी पार्षद उमा बेरी तक को दोबारा हाउस में खड़े होकर अधिकारियों से नाराजगी जतानी पड़ी। इतना ही नहीं मेयर राजा को भी अफसरशाही से नाराजगी व गुस्सा जताना पड़ा कि स्वीपिंग मशीन की रिपोर्ट उनकोे नहीं दी जा रही है।
हालात यह है कि जहां शहर के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट लटक गये हैं वहीं वरियाणा कूड़े के डंप का मामला भी अटका हुआ है। स्वीपिंग मशीन में घोटाला इसकी अभी रिपोर्ट ब्यूरोक्रेसी तैयार नहीं कर पायी है, जांच तो दूर की बात है। पिछली सरकार के समय हुए एलईडी में भी घोटाला होने का शोर मचाया जा रहा है लेकिन अभी इसकी तरफ भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। जालंधर के कांग्रेसी पार्षद प्रभदयाल, पार्षद राजीव टिक्का की तो शिकायत है कि वह जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं और उलटा अधिकारी उनकी बेइज्जती करने पर तुले हुए हैं।
अधिकारियों की जिम्मेदारी तो फिक्स की जाएगी : मेयर
अफसरशाही के बेलगाम की बात पर मेयर राजा का कहना है कि देखो अधिकारियों को उत्तर तो देना ही होगा। पार्षद जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं और वह जनता के प्रति जवाबदेह हैं। पार्षदों की समस्याएं जनता की समस्याएं होती हैं, उनको अफसरशाही दरकिनार नहीं कर सकती। इसलिए 27 साल बाद परंपरा शुरू की है कि पिछली हाउस की बैठक का लोखा जेखा अगली बैठक में लिया जाएगा। अधिकारियों की जिम्मेदारी फिक्स की जाएगी, ऐसा उन्होंने कमिश्नर से भी कह दिया है।