अमरनाथ यात्रा एक माह करने पर होगा विचार-विमर्श
राजभवन में हुई बैठक में एसएबीएलओ ने राज्यपाल व अधिकारियों के समक्ष रखी समस्याएं
एसएबीएलओ ने कहा तीस दिन में 90 फीसदी श्रद्धालु कर लेते हैं यात्रा
एक माह के बाद घोड़े वाले, टेंट, पोनी, पाल्की वाले व पिट्ठू लौट जाते हैं
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर। श्रीनगर स्थित राजभवन में आयोजित अमरनाथ श्राइन बोर्ड की बैठक में श्री अमरनाथ बफार्नी लंगर आर्गेनाइजेशन (एसएबीएलओ) ने यात्रा की अवधि एक माह किए जाने का प्रस्ताव रखा। लंबी अवधि के दौरान आ रही परेशानियों के बारे में राजभवन में उपस्थित राज्यपाल एनएन वोहरा व बोर्ड के अधिकारियों को अवगत करवाया। एसएबीएलओ ने कहा कि तीस दिन के भीतर 90 फीसदी शिवभक्त यात्रा कर लेते हैं, इसके बाद शिवभक्तों का आना लगभग बंद हो जाता है। इस प्रस्ताव पर राज्यपाल ने विचार-विमर्श करने का आश्वासन दिया है। यह जानकारी एसएबीएलओ के महासचिव राजन गुप्ता ने दी।
बालटाल से टेलीफोन पर महासचिव राजन गुप्ता ने बताया कि राजभवन में आयोजित बैठक में एसएबीएलओ के प्रतिनिधियों को भी बुलाया गया। बैठक में एसएबीएलओ के प्रधान विजय ठाकुर, महासचिव राजन गुप्ता, कोषा अध्यक्ष अमर गोयल व ज्वाइंट सेक्रेटरी पंकज सोनी शामिल हुए। राजन गुप्ता ने बताया कि बैठक में उपस्थित श्राइन बोर्ड के अधिकारी व जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एनएन वोहरा के समक्ष प्रस्ताव रखा गया कि यात्रा की अवधि एक माह की जाए, ताकि भंडारे वालों को परेशानी का सामना न करना पड़े। अधिकारियों को बताया गया कि 20 से 25 दिन के भीतर लगभग 90 फीसदी श्रद्धालु पवित्र गुफा के दर्शन कर लेते हैं। इसके बाद श्रद्धालुओं का आना-जाना न के बराबर हो जाता है। अधिकतर श्रद्धालु पवित्र शिवलिंग के दर्शन करना चाहते हैं, जबकि शिवलिंग लगभग 25 दिन के अंदर ही पिगल जाता है। इसके अलावा यात्रियों की संख्या कम होने के कारण घोड़े वाले, पालकी वाले, पोनी वाले, पिट्टू वाले, टेंट वाले व दुकानदार तक चले जाते हैं। सिर्फ भंडारे वाले और सिक्योरिटी वाले वहां पर रहते हैं। इससे भंडारे वालों का बहुत नुकसान होता है।
गुप्ता ने अधिकारियों को रिकार्ड दिखाया कि वर्ष 2011 में तीस दिनों में छह लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिए थे, इसी तरह 2013 में बीस दिन के भीतर 267618 श्रद्धालुओं ने माथा टेका, 2014 में बीस दिन में 265500 श्रद्धालुओं, 2015 में 262358 श्रद्धालुओं, 2016 में 193472 श्रद्धालुओं व 2017 में 216555 श्रद्धालुओं ने माथा टेक चुके थे। वर्ष 2016 में बीस दिन के बाद सिर्फ 27018 श्रद्धालु व 2017 में 43448 श्रद्धालुओं ने माथा टेका था। एसएबीएलओ ने सुझाव दिया कि एक दिन में बालटाल और पहलगाम के रास्ते से लगभग 7500 श्रद्धालुओं की बजाय 8500 श्रद्धालुओं को पवित्र गुफा के दर्शन वास्ते छोड़ा जाए। कई जगहों पर रास्ते बहुत छोटे हैं उन्हें बड़ा किया जाए। कई ऐसे रास्ते हैं जहां पर लकड़ी या फिर स्टील की सीढ़ी बनाई जाएं, जिससे आसानी से व्यक्ति चढ़ सके। गुप्ता ने बताया कि राज्यपाल ने कहा कि यात्रा की एक माह की अवधि पर विचार-विमर्श के साथ ही लोगों के भी विचार लिए जाएंगे, उसके बाद अगले वर्ष यात्रा की अवधि तय की जाएगी।