स्थानीय सिविल अस्पताल में शनिवार को गर्भ में हुई बच्ची की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। परिजनों ने मामले में अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।
वहीं एसएमओ जसबीर सिंह महिला के अस्पताल में भर्ती होने से पहले ही गर्भ में बच्ची के मरने की बात कह रहे हैं। डीसी अनदित्ता मित्रा ने पूरे मामले की जांच एसडीएम को सौंप दी है।
मामला गांव पुन्नूमजारा की एक महिला की बच्ची की गर्भ में मौत होने का है। गांव पुन्नूमजारा निवासी सुरजीत लाल ने डीसी को बताया कि उनकी पत्नी कुलदीप कौर गर्भवती थी। उसका इलाज अस्पताल में चल रहा था। उनका साला हेमराज अपनी बहन को लेकर 17 जनवरी की सुबह जांच के लिए अस्पताल लेकर आया था।
जांच के बाद डाक्टरों ने कहा था कि जच्चा-बच्चा दोनों ठीक हैं और एक सप्ताह में डिलीवरी हो जाएगी। उसी रात यानी शुक्रवार को उनकी पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। वह उसे फिर से सिविल अस्पताल ले आए। लेकिन पूरी रात किसी ने भी उसकी देखभाल नहीं की। उसकी पत्नी दर्द से तड़पती रही। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल स्टाफ ने उनकी पत्नी की ठीक ढंग से देखभाल नहीं की, जिसके चलते उनकी पत्नी ने मरी हुई बच्ची को जन्म दिया।
इस मामले में एसएमओ जसबीर सिंह का कहना है कि शुक्रवार सुबह महिला और उसके गर्भ में पल रहा बच्चा ठीक था, लेकिन इसके बाद जब वह रात को महिला को अस्पताल लेकर आए, तो बच्चा ठीक नहीं था। गर्भ में बच्चे की मौत होने पर डिलीवरी करवाने में अधिक समय लगता है।
इसलिए शनिवार दोपहर बाद को डिलीवरी हुई, जिसमें बच्ची मरी हुई थी। अब शुक्रवार सुबह के चेकअप से रात में दोबारा महिला को अस्पताल दाखिल करवाने के बीच क्या हुआ, यह वह नहीं कह सकते। डीसी अनदित्ता मित्रा ने परिवार को आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच एसडीएम से करवाई जाएगी।