पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व चीफ जस्टिस एसएस दीवान के पारिवारिक मामले में कड़ा फैसला लेते हुए उनके पुत्र सुवीर दीवान को मकान खाली करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस एजी मसीह पर आधारित खंडपीठ ने इस मामले में फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने कहा कि पूर्व चीफ जस्टिस के पुत्र 15 दिन के भीतर चंडीगढ़ के सेक्टर- 11बी स्थित मकान नंबर 642 को पंद्रह दिन के भीतर खाली कर उसकी चाबी शिकायतकर्ता को सौंप दें।
इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने सुवीर दीवान पर 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। साथ ही चंडीगढ़ के एसएसपी को निर्देशों के अनुपालन पर कड़ी निगाह रखने के निर्देश भी दिए।
हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के एसएसपी को निर्देश जारी किए कि वह हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना पर पूरी नजर रखें। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर प्रतिवादी (पूर्व जस्टिस के पुत्र) के पुत्र प्रापर्टी में शेयर को लेकर कोई कानूनी रेमेडी चाहते हैं, तो वह सिविल प्रोसिडिंग्स के तहत मामला दाखिल कर सकते हैं।
हाईकोर्ट ने इस मामले में 17 मई को सिंगल जज के फैसले के भी रद कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में पाया गया कि हाईकोर्ट के मध्यस्थता को लेकर गठित कमेटी को भी प्रतिवादी सुवीर दीवान की तरफ से कोई सहयोग नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट पूर्व चीफ जस्टिस एसएस दीवान का सम्मान करती है। उन्होंने कड़ी मेहनत से मुकाम हासिल किया और अपने पुत्र को भी वकालत में स्थापित किया। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने पुत्र को पंचकूला में मकान भी गिफ्ट किया।
हाईकोर्ट ने पूर्व चीफ जस्टिस के पुत्र को निर्देश दिए कि वह 15 दिन के भीतर 50 हजार रुपये की राशि शिकायतकर्ता को देने के भी निर्देश दिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि यूटी प्रशासन को भी निर्देश जारी किए ऐसे मामलों पर काबू पाने के लिए एक इन्फोर्समेंट तंत्र स्थापित करने के निर्देश जारी किए।
हाईकोर्ट ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन एक सप्ताह में यह तंत्र स्थापित कर ले, ताकि बुजुर्गों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
यह है मामला
पूर्व चीफ जस्टिस शांति स्वरूप जैन दीवान व उनकी पत्नी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर यह मामला उठाया था। याचिका में कहा गया कि पापर्टी विवाद के चलते उनका पुत्र उन्हें हररोज तंग कर रहा है।
हाईकोर्ट से आग्रह किया गया कि उसे मकान खाली करने के निर्देश जारी किए जाएं, ताकि वह अपनी बची हुई जिंदगी शांति से गुजार सकें।