मंदिरों और गुरुद्वारों में विवाह कर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच रहे प्रेमी जोड़ों पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है।
हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच ने तीन ऐसी याचिकाओं को रद्द कर दिया, जो विवाह करने के बाद सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी।
हाईकोर्ट के जस्टिस एके मित्तल ने कहा कि हम यहां प्रेमी जोड़ों के अवैध विवाहों को सर्टिफाई करने के लिए नहीं बैठे हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे रन अवे कपल्स को हाईकोर्ट का आर्डर के दस्तावेज एक सर्टिफाई की कॉपी की तरह मिल जाते हैं, जिससे यह साबित हो जाता है कि उक्त दोनों याचियों ने विवाह किया है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस एके मित्तल ने पाया कि याचिकाओं के साथ अटैच किए गए फोटो हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 5 और 7 के साथ मेल ही नहीं खाते हैं। यह भी साबित नहीं होता कि उनका विवाह वैध है या नहीं।
हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं को रद्द करते हुए कहा कि मैं अभी कोई सख्त आदेश जारी नहीं करना चाहता। मुझे पता है कि यह बहुत बड़ा फ्रॉड है। यह याचिकाएं भी पैकेज का हिस्सा हैं।
याचियों के वकील से पूछा कि आप जानते हो कि विवाह कैसे पंजीकृत होते हैं। क्या आपने एविडेंस एक्ट पढ़ा है? क्या मंदिर और गुरुद्वारों से मिले सर्टिफिकेट एविडेंस का हिस्सा हैं? क्या आप नहीं जानते कि विवाह प्रॉपर तरीके से पंजीकृत होने चाहिए।
हाईकोर्ट ने पाया कि पंजाब और हरियाणा के प्रेमी जोड़े चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला की शरण लेते हैं और एक दिन में ही यहां के मंदिरों में विवाह कर हाईकोर्ट पहुंच जाते हैं।
एक अन्य याचिका में हाईकोर्ट ने याचियों के वकील से पूछा कि अगर आपको लड़की के परिवारों वालों की तरफ से थ्रेट है तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज क्यों नहीं करवाते?