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ग्राउंड रिपोर्ट: पाक सीमा पर बसे गांवों के लोगों का दर्द- देश तो आजाद हो गया, हम समस्याओं में कैद हो गए

Thu, 10 Feb 2022 11:22 AM IST
निवेदिता वर्मा रविंदर शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)

सार

ग्रामीणों ने बताया कि 70 वर्षों से कांग्रेस और अकाली दल बारी बारी से यहां काबिज हैं। नेता गांव की गलियां और नालियां पक्का करवाने के झांसे देकर बेवकूफ बनाते रहे हैं। न यहां स्कूल हैं, न स्वास्थ्य केंद्र।
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धनोआ कलां में खराब सड़क दिखाते बुजुर्ग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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पंजाब के अमृतसर में पाकिस्तान की सीमा से सटे गांव धनोए कलां और रोड़ा कलां के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वोट लेने के लिए तरह तरह के वादे कर हमें हर बार ठगा ही गया है। हर पांच साल बाद नेता आते हैं और समर्थन लेने के लिए हर हथकंडा अपनाते हैं। जीतने के बाद कोई मुड़कर नहीं आता। देश तो आजाद हो गया मगर हम समस्याओं में कैद हो गए। 70 साल से मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। सरकारी बस तक नसीब नहीं हुई। 

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अमर उजाला से बातचीत में सीमा पर फेंसिंग से सटे गांव रोड़ा कलां के पूर्व सरपंच हरदेव सिंह व मौजूदा पंचायत सदस्य जगरूप सिंह, तरसेम सिंह ने बताया कि 70 वर्षों से कांग्रेस और अकाली दल बारी बारी से यहां काबिज हैं। नेता गांव की गलियां और नालियां पक्का करवाने के झांसे देकर बेवकूफ बनाते रहे हैं। न यहां स्कूल हैं, न स्वास्थ्य केंद्र। इनकी तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। गांव की आबादी करीब 1100 है और इसमें करीब 600 मतदाता हैं।

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भारत-पाक सीमा से ही सटे गांव पुल मोरां के आकाशदीप सिंह, सुखजिंदर कौर और अजीत सिंह ने बताया कि 1947 में उनके पूर्वज चैंचल सिंह ने धनोआ कलां से बाहर डेरे पर अपना घर बनाया था। आज यहां एक ही कुटुंब के 9 परिवार रहते हैं। पुल मोरां गांव में कुल जनसंख्या 82 है, जिनमें 47 मतदाता हैं। यहां न कोई स्कूल है, न कोई स्वास्थ्य केंद्र है। हर बार नेता चुनावों में उनके पास हाथ जोड़कर वोट डलवा लेते हैं, लेकिन फिर कभी लौट कर नहीं आते। आज तक उनके गांव में 100 मीटर लंबी सड़क नहीं बन सकी। बारिश के दिनों में तो घर से बाहर निकलना भी दूभर हो जाता है। 
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सीमांत गांव धनोए कलां के बुजुर्ग शिव सिंह, नरिंदर सिंह, इंद्रजीत सिंह और जगतार सिंह ने बताया कि करीब बीस साल पहले गांव के लोगों ने मिलकर तालाब पूरा करके वहां बस अड्डा बनाया, ताकि उनके गांव तक बस पहुंच सके। उन्होंने बताया कि कुछ सालों तक सरकारी बस के साथ-साथ प्राइवेट बस भी आई, लेकिन बाद में सेवा बंद हो गई। आज लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए आधे घंटे से अधिक पैदल चलना पड़ता है। गांव की जनसंख्या 2 हजार के करीब है, जबकि इनमें 1365 मतदाता शामिल हैं। चुनावों के दौरान हर राजनीतिक पार्टी का नेता उनके गांव में आकर उन्हें समर्थन देने की अपील करता है, लेकिन फिर कभी लौट कर नहीं आता।

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